करौली में सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू:व्याख्याता शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे, स्वरोजगार सहित कई मुद्दों पर चर्चा

करौली के राजकीय महाविद्यालय में सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर आशु रानी मुख्य मेहमान रहीं, जबकि जय मीनेष विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर टीकम चंद्र लोया मुख्य वक्ता रहे। आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा के संयुक्त निदेशक प्रोफेसर श्रीमन रावत और सहायक निदेशक (एचआरडी) डॉ. रामस्वरूप मीना विशिष्ट मेहमान के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं द्वारा स्वागत गीत और सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति से हुई। महाविद्यालय के प्रिंसिपल रफीक अहमद ने सभी अतिथियों का माला, साफा और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया तथा उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए। कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. प्रीतम सिंह मीना ने सात दिवसीय कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्यों और उपयोगिता से प्रतिभागियों को अवगत कराया। वहीं, संयोजक राम सिंह मीना ने कार्यशाला की भूमिका, उद्देश्य और साप्ताहिक कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रोफेसर आशु रानी ने अपने संबोधन में लैब तकनीकों को दैनिक जीवन से जोड़ने, उनकी उपयोगिता, नवीन प्रविधियों और प्रयोगधर्मिता पर जोर दिया। उन्होंने स्वरोजगार से जुड़े छोटे-छोटे उपकरणों और नवाचारों को अपनाने तथा प्राकृतिक प्रयोगशालाओं की स्थापना की आवश्यकता बताई।मु
ख्य वक्ता प्रोफेसर टीकम चंद्र लोया ने प्रयोगशालाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर जीवन को सरल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया और विद्यार्थियों को सतत नवाचार के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट मेहमान प्रोफेसर श्रीमन रावत ने शिक्षण में प्रायोगिक कार्यों के महत्व को रेखांकित किया, जबकि डॉ. रामस्वरूप मीना ने सभी शैक्षिक धाराओं में प्रयोग आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक आचार्य शुचि मीणा, डॉ. सोनम बामनिया और विश्राम सिंह मीना द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, कर्मचारी और प्रतिभागी मौजूद रहे।

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