भोपाल के अरनव अस्पताल का CMHO कार्यालय की टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें अस्पताल को क्लीन चिट दी गई थी। अब यह रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में है। दरअसल, अस्पताल में कई ऐसे नर्सिंग स्टाफ के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने कभी अरनव अस्पताल में काम ही नहीं किया है। इस मामले में तीन नर्सिंग ऑफिसर्स ने अलग-अलग शिकायतें पुलिस कमिश्नर से की थीं, जिनमें आरोप लगाया गया कि उनका नर्सिंग सर्टिफिकेशन अरनव अस्पताल ने बिना उनकी जानकारी के इस्तेमाल किया है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर NSUI ने CMHO डॉ. मनीष शर्मा से शिकायत की कि अरनव अस्पताल की फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई है। अब इसी शिकायत के बाद CMHO ने अस्पताल के निरीक्षण में शामिल अपनी ही टीम के दो डॉक्टरों को नोटिस दिया है, जिसमें उनसे इन शिकायतों के बाद रिपोर्ट से जुड़े प्रूफ और स्पष्टीकरण की मांग की गई है। इन दो डॉक्टरों को मिला नोटिस
डॉ. मनीष शर्मा द्वारा जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रितेश रावत और यूपीएचसी सांई बाबा नगर में पदस्थ डॉ. अभिषेक सेन को नोटिस जारी कर निरीक्षण रिपोर्ट में की गई गंभीर त्रुटियों और तथ्यों को लेकर तत्काल स्पष्टीकरण तलब किया गया है। NSUI ने किया था प्रदर्शन
इस मामले को लेकर गुरुवार को एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार और जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा सीएमएचओ कार्यालय का घेराव कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। एनएसयूआई का आरोप है कि अरनव अस्पताल की निरीक्षण रिपोर्ट जानबूझकर कूटरचित तैयार की गई, जिससे शासन एवं प्रशासन को गुमराह किया गया। जांच… यह लापरवाही या जानबूझकर किया फर्जीवाड़ा
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने दोषी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की, साथ ही पूरे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई किए जाने की भी मांग उठाई। जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यदि इस तरह के मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो स्वास्थ्य व्यवस्था में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा असर मरीजों और नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। आगे उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, संगठन इस मामले को लगातार उठाता रहेगा।


