पन्ना टाइगर रिजर्व में दो साल पुराने एक वीडियो के मामले में वन बल प्रमुख ने जांच के आदेश दिए हैं और सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। दिसम्बर 2023 के इस वीडियो के आधार पर पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने नवंबर 2025 में टाइगर रिजर्व के गाइड और ड्राइवरों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की। इसके लिए कोई जांच की कार्रवाई नहीं की गई। बिना किसी जांच के हुई इस कार्रवाई पर अब वन विभाग के अफसरों से जवाब तलब किया गया है। क्योंकि पन्ना टाइगर रिजर्व ने इस वीडियो को 2 साल तक छिपाए रखा। दरअसल जो वीडियो वायरल हुआ है। उसमें गाइडों द्वारा अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग कर नियमों की अनदेखी की गई। पर्यटकों को जिप्सी वाहन से बाहर उतरवाकर बाघ दिखाया गया। यह न केवल खतरनाक था, बल्कि इससे किसी भी अप्रिय घटना की संभावना भी बन सकती थी। इसकी जानकारी सामने आने के बाद वाइल्ड लाइफ आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इस मामले की शिकायत दो दिन पहले वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े और एनटीसीए के सदस्य सचिव से लिखित में की थी। इसमें कहा गया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में विस्थापित समुदाय के गाइड और ड्राइवर मेहनत कर रोजगार हासिल करते हैं, इन पर टाइगर रिजर्व के अफसरों ने दमनात्मक कार्रवाई की है। सुनवाई बगैर कार्रवाई पर आपत्ति आरटीआई एक्टिविस्ट दुबे के अनुसार, पन्ना टाइगर रिजर्व के प्रभारी फील्ड डायरेक्टर नरेश यादव और डिप्टी डायरेक्टर मोहित सूद द्वारा दिसम्बर 2023 में वायरल वीडियो के आधार पर 29 नवम्बर 2025 को कुछ गाइड और जिप्सी ड्राइवर पर आर्थिक दंड लगाकर एक माह के लिए उन्हें प्रतिबंधित कर दिया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि टाइगर 151 रेडियो कॉलर पहने 4 बच्चों के साथ है और वर्तमान में यह बाघिन 2 बच्चों के साथ बिना रेडियो कॉलर के देखी जाती है। इस मामले में गाइड और ड्राइवर को सुनवाई बगैर कार्रवाई की गई है। अफसरों ने इस पुराने वीडियो की समय पर जांच नहीं की है और अब कार्रवाई कर किसी साजिश को अंजाम दिया जा रहा है। सात दिन में मांगी रिपोर्ट शिकायत में कहा गया है कि वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाए और समय पर जांच और कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की जाए। इस शिकायत के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े ने सोमवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) और मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक को मामले की जांच कर घटना में लिप्त कर्मचारियों, अधिकारियों पर कार्रवाई करके वन बल प्रमुख कार्यालय को सात दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा है। इन पर की गई कार्रवाई पन्ना टाइगर रिजर्व के अफसरों ने गाइड और चालक संतोष कुमार शिवहरे, मोहम्मद नेहाल, जिलानी मोहम्मद, विक्रमादित्य सिमह परमार, अजय तिवारी, रामदास रैकवार, पुष्पा सिंह, साक्षी राय और घनश्याम तिवारी के खिलाफ यह कार्रवाई की है। जो आदेश जारी कर कार्रवाई की गई है। उसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया पर 27 नवंबर 2025 को वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। वीडियो में गाइड एवं वाहन चालकों द्वारा पर्यटकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए पार्क प्रबंधन और NTCA के नियमों का उल्लंघन किया गया। पर्यटकों से 10 से 20 फीट दूर से निकले बाघ पार्क प्रशासन द्वारा जांच में पाया गया कि गाइडों द्वारा अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग कर नियमों की अनदेखी की गई। पर्यटकों को जिप्सी वाहन से बाहर उतरवाकर बाघ दिखाया गया। बताया जाता है कि यह दूरी दस से बीस फीट की ही रही। यह न केवल खतरनाक था, बल्कि इससे किसी भी अप्रिय घटना की संभावना भी बन सकती थी। इस मामले में संबंधित पर्यटक वाहनों के मालिकों एवं गाइडों को दोषी मानते हुए वन विभाग ने एक माह के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही हर व्यक्ति पर 2000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। अफसरों ने माना, विभाग की छवि धूमिल हुई वन परिक्षेत्र अधिकारी, पन्ना टाइगर रिजर्व, मडला द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार का व्यवहार अत्यंत अनुचित है और इससे पन्ना टाइगर रिजर्व की छवि धूमिल हुई है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी। वन विभाग ने सभी गाइडों और वाहन चालकों को पर्यटन नियमों का कड़ाई से पालन करने की चेतावनी भी दी है।


