रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाइवे-130 को एनएचएआई ने निजी हाथों में सौंप दिया है। आज से नेशनल हाईवेज इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट (एनएचएआईटी) नेशनल हाइवे में कामकाज शुरू करेगा। लेकिन 5 साल पहले ही 1706 करोड़ की लागत से बनाई गई इस सड़क की हालत खराब है। 127 किमी लंबी इस सड़क में हर 200 मीटर की दूरी पर दरारें हैं। कई जगहों पर मल्टीपल क्रैक हैं, जिसके चलते पूरा का पूरा पैनल ही बदलना पड़ेगा। कांक्रीट की सड़क के बीच कई जगहों पर दरारें इतनी चौड़ी हैं कि वाहनों के टायर तक फंस रहे हैं। जिन कंपनियों ने इसे बनाया उनका ठेका समाप्त हो चुका है। अनुबंध शर्तों के तहत कंपनियों को सड़क चकाचक लौटानी है पर सुधार के नाम पर कंपनी के कर्मचारी रेत में केमिकल डालकर कांक्रीट की सड़क का गैप भर रहे हैं। रायपुर-बिलासपुर एनएच को निजी हाथों में सौंपने से पहले भास्कर ने सड़क की पड़ताल की। सड़क की हालत इतनी खराब है कि कई जगहों पर पैनल बदलने का काम जारी है। अकेले सारागांव से बिलासपुर के बीच ही करीब 49 पैनल बदलने का काम ठेका कंपनी कर रही है। सड़क धंसने से बिगड़ रहा गाड़ियों का संतुलन सिमगा से सारागांव के बीच लिमतरा मोड़ के पास ही सड़क 8 इंच तक बैठ गई है। इसके चलते गाड़ियों का बैलेंस बिगड़ रहा है। मोड़ के पास ही एक हिस्सा ऐसा है, जहां पर दो-लेन सड़क के बीच में इतना गैप है कि गाड़ियों के टायर भी फंस जाते हैं। नेशनल हाइवे में वो हिस्से ज्यादातर खराब हैं, जहां ओवरब्रिज है या फिर अंडरपास। यहां पुल पर मिलने वाली सड़क नीचे बैठ गई है। इसके चलते अचानक से गाड़ियां जम्प करती हैं। रायपुर से सिमगा तक सड़क के दोनों ओर गैप भरना है
इस सड़क पर रायपुर से लेकर बिलासपुर तक कई जगहों पर लंबा क्रैक मिला। भास्कर की टीम जब रायपुर से धनेली होते हुए एनएच पर पहुंची तो जगह-जगह पर बड़े पैच में सड़कें कई जगहों पर टूटी हुई मिलीं। इन पर डामर की परत चढ़ाई गई है, जिसमें भी गैप आ गया है। यही कारण है कि अब इसमें रेत और केमिकल का मिश्रण भरा जा रहा है। रायपुर की ओर सिमगा से ठीक पहले निजी कंपनी के ठेका कर्मचारी यह काम कर रहे थे। कर्मचारियों ने बताया कि फिलहाल हमें इसी तरह गैप भरने कहा गया है। रायपुर से सिमगा तक सड़क के दोनों ओर गैप भरना है। मोड़, सर्विस रोडपर रिफ्लेटर ही नहीं
नेशनल हाइवे में लाइटें केवल ग्रामीण एरिया और ब्रिज पर ही हैं। शेष सड़कों पर लाइटें ही नहीं है। इसलिए अंधेरा पसरा रहता है। यही नहीं सड़क पर जहां मोड़ है, जहां ओवरब्रिज के नीचे सर्विस रोड है, वहां से रिफ्लेक्टर भी गायब है। यही नहीं एनएच में पड़ने वाले बड़े शहर या गांवों के एंट्री प्वाइंट ऐसे बनाए गए हैं, जो जो दिखते ही नहीं। हाई कोर्ट लगा चुका है फटकार
रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाइवे की खराब स्थिति को लेकर हाईकोर्ट कई बार एनएचएआई के अफसरों को फटकार लगा चुका है। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान भी लिया था। वहीं इसी साल अगस्त के महीने में अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा था कि अधिकारी सड़क मार्ग से सुनवाई के लिए हाईकोर्ट आएंगे। एक साल में 231 हादसे, 86 मौत
खराब सड़क के चलते रायपुर-बिलासपुर हाइवे में लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। दोनों ही जिलों के यातायात विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक साल में रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाइवे में करीब 231 सड़क हादसे हुए हैं। इन हादसों में 86 लोगों की मौत हुई है। भास्कर एक्सपर्ट – प्रदीप कुमार लाल, रीजनल आफिसर एनएचएआई छत्तीसगढ़ पांच साल में ही एनएच की हालत खराब है, सड़क निजी हाथों में क्यों सौंप रहे?
सड़क खराब हो गई है। ठेकेदार मरम्मत कर रहा है। दो माह के भीतर पूरा पैनल बदलकर हम प्राइवेट कंपनी को 20 साल के लिए दे रहे हैं। इसका फायदा है कि 20 साल तक टोल वसूली करते तब इतना पैसा आता अब एकमुश्त में पैसा मिल जाएगा। विभाग उस पैसे का उपयोग कर सकेगा। खराब सड़क की मरम्मत कौन करेगा?
पुरानी कंपनियां सड़क की मरम्मत का काम कर रहीं है। इसके बाद सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी नई कंपनी की रहेगी। अगर पुरानी कंपनी काम नहीं करेगी तो रिस्क एंड कास्ट से करवाकर देंगे। हमारा टारगेट है सड़क दो माह के भीतर अच्छी हो जाए। नेशनल हाइवे पर लाइटें नहीं है, रिफ्लेक्टर गायब हैं, एंट्री प्वाइंट का पता नहीं चलता?
जहां ब्रिज और गांव है वहां स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। यदि रिफ्लेक्टर और एंट्री प्वाइंट मिसिंग है तो उसे लगाने का काम चल रहा है और यह सब रेगुलर चलता रहता है।


