नए बजट में पेट्रोल सब्सिडी पर संशय, सरकार ड्रॉप भी कर सकती है योजना

देश भर में पेट्रोल की कीमतें जब आसमान छूने लगीं, तब झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के जनवरी में पेट्रोल सब्सिडी योजना शुरू की। इसके तहत खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में आने वाले लोगों को बाइक में पेट्रोल भरवाने के लिए हर माह 10 लीटर पेट्रोल पर प्रति लीटर 25 रुपए सब्सिडी देने की शुरुआत की गई। पेट्रोल सब्सिडी लेने वाले लाभुकों का आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2021-22 में 2,04,841 तक था। वित्तीय वर्ष 2022-23 में लाभ लेने वालों की संख्या 2,52,292 तक पहुंच गई, जो सबसे ज्यादा थी। लेकिन, वर्तमान वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 29,676 तक ही पहुंच पाया है। जबकि, इस वित्तीय वर्ष को समाप्त होने में मात्र ढाई माह ही बचे हैं। लगातार लाभुकों की संख्या घटने से इस योजना पर अब संशय के बादल छाने लगे हैं। लाभुकों की ज्यादा दिलचस्पी नहीं होने की वजह से सरकार इस योजना को बंद करने पर भी विचार कर सकती है। ऐसे घटे पेट्रोल सब्सिडी के लाभुक वित्तीय वर्ष कुल आवेदन लाभ मिला 2021-22 2,58,952 2,04,841 2022-23 2,86,011 2,52,292 2023-24 1,61,604 1,09,927 2024-25 47,806 29,676 4 बड़े कारण… जिनसे लाभुकों ने छोड़ दी सब्सिडी 1. योजना शुरू होते ही यह अफवाह फैल गई कि जो पेट्रोल सब्सिडी लेगा, उसका राशन कार्ड रद्द हो जाएगा। उन्हें अनाज नहीं मिलेगा। यह सरासर गलत था। 2. लोग यह समझ रहे थे कि कि एक बार रजिस्ट्रेशन कराने के बाद सब्सिडी की सुविधा मिलती रहेगी। जबकि, रजिस्ट्रेशन के बाद हर महीने सीएम सपोर्ट एप पर जाकर सब्सिडी के लिए मैसेज भेजना पड़ता है। लोग ऐसा नहीं करते, इसलिए उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। 3. लाभुकों में एक भ्रम यह भी रहा कि रजिस्ट्रेशन के समय जब बैंक खाता नंबर लिया ही नहीं गया तो पैसे कैसे ट्रांसफर होंगे। इसलिए ज्यादातर लोगों ने अपने खाते तक नहीं जांचे कि पैसे आए या नहीं। जबकि, ये पैसे आधार नंबर से जुड़े बैंक खातों में दिए जाने वाले हैं। 4. ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर लोग सेकेंड हैंड मोटरसाइकिल खरीदते हैं और उसे अपने नाम पर ट्रांसफर नहीं कराते। इससे वे सब्सिडी के लिए अपने नाम से आवेदन नहीं कर सकते। क्योंकि, योजना में है कि आवेदक के खुद के नाम पर मोटरसाइकिल होनी चाहिए। 20 करोड़ में से 11 करोड़ सरेंडर पेट्रोल सब्सिडी योजना के प्रथम चरण में 20 लाख कार्डधारियों (जिनके पास दोपहिया वाहन) को लाभ मिलने की संभावना पर राज्य सरकार ने बजट में प्रावधान किया था। जिस समय यह योजना लागू की गई, उस समय राज्य में कुल कार्डधारियों की संख्या करीब 60 लाख थी। इसमें प्रायोरिटी हाउसहोल्ड कार्डधारियों की संख्या 50,18,473 और अंत्योदय राशन कार्डधारियों की संख्या 8,99,400 थी। दोपहिया वाहन कार्डधारियों के एक सदस्य को हर महीने 10 लीटर पेट्रोल पर प्रति लीटर में 25 रुपए की छूट मिलनी थी। इस तरह से दोपहिया वाहन रखने वाले कार्डधारियों के एक सदस्य को हर महीने 250 रुपए मिलना था। ये राशि डीबीटी के माध्यम से उसके बैंक अकाउंट में भेजी जानी थी। पेट्रोल खरीदते समय लाभुक को पंप पर पूरे पैसे चुकाने थे। सरकार का आकलन था कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के अंतिम तीन महीने में ही करीब आठ लाख लोग पेट्रोल सब्सिडी का लाभ लेंगे। ऐसे में 20 करोड़ का बजट रखा गया। इसके बावजूद सिर्फ 2,06,163 लाभुकों ने ही इसका फायदा लिया। इसकी वजह से बचे 11 करोड़ रुपए सरेंडर कर दिए गए। वहीं, बाद के वित्तीय वर्षों में इस मद में बजट काफी घटा दिया गया।

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