प्रदेश में खाद संकट के बीच लोकसभा में पेश आंकड़ों ने मध्यप्रदेश की चिंता बढ़ा दी है। खाद की गलत जगह सप्लाई (डायवर्जन) के मामलों में मप्र देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि घटिया गुणवत्ता वाली खाद के मामलों में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 9 महीनों में मप्र में गलत सप्लाई के 631 मामले सामने आए। इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जिनमें से 160 खाद आपूर्तिकर्ताओं के लाइसेंस रद्द किए गए और 15 मामलों में एफआईआर दर्ज हुई। लोकसभा में दिए आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 नवंबर के बीच मप्र में उर्वरक से जुड़े मामलों में 91 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 204 खाद विक्रेताओं और संस्थानों के लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किए गए। विपक्ष और किसान संगठनों का आरोप है कि कई जगहों पर राजनीतिक दबाव और प्रभावशाली नेताओं को खुश करने के लिए खाद की सप्लाई जरूरत वाले इलाकों की बजाय अन्य क्षेत्रों में भेजी गई, जिससे वास्तविक जरूरत वाले किसानों को संकट झेलना पड़ा।


