30 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला:हाईकोर्ट में आईजी बोले- विक्रम भट्‌ट के खिलाफ FIR से पहले गहन जांच की, प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी प्रमाणित

इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया से 30 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में रिमांड पर चल रहे फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट व उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को जोधपुर हाईकोर्ट से सोमवार को भी राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट जस्टिस समीर कुमार जैन की बेंच ने कहा कि सभी पक्ष मंगलवार को लिखित में भी अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। सोमवार को हाईकोर्ट जस्टिस समीर कुमार जैन के समक्ष उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव, एसपी योगेश गोयल और आईओ छगनलाल राजपुरोहित वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। इस दौरान आईजी श्रीवास्तव ने उदयपुर पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी विक्रम भट्ट व उनकी पत्नी सहित सभी आठों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले पीड़ित डॉ. अजय मुर्डिया की शिकायत को दस्तावेजों-तथ्यों के आधार पर अच्छी तरह से जांचा-परखा गया। मामले की गंभीरता को समझते हुए ही एसपी योगेश गोयल ने जांच के लिए डिप्टी स्तर के अधिकारी को आईओ नियुक्त कर जांच-पड़ताल कराई, फिर एफआईआर दर्ज की। प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों व कई प्रकार के तथ्यों से प्रमाणित हुआ कि यह मामला धोखाधड़ी का है। तुरंत जांच-पूछताछ की आवश्यकता है। आरोपी भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट व काे-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी की वॉट्सएप चैट में मिला है कि डॉ. अजय मुर्डिया से करार के रूप में ली गई पहली राशि 2.50 करोड़ में से लाखों रुपयों से अपनी पुरानी ईएमआई चुकाई और फिल्म हॉन्टेड-2 का भी 30 लाख से अधिक का बकाया चुकाया है। बता दें, आरोपी भट्ट दंपती की ओर से पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में दलील दी गई कि यह मामला सिविल प्रवृत्ति का है। पुलिस ने जल्दबाजी में धोखाधड़ी की धारा में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी कर ली। इसलिए कोर्ट ने पुलिस व पीड़ित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया। अब पीड़ित डॉ. मुर्डिया की ओर से दलील दी गई कि उपलब्ध दस्तावेजों से प्रमाणित है कि डॉ. मुर्डिया के साथ पहले ही दिन से धोखाधड़ी की गई। अभी-भी इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है। आरोपी की प्रवृत्ति पूर्व में भी धोखाधड़ी की रही है। पूर्व में भी मुंबई में ऐसे ही धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। हाईकोर्ट में आईजी बोले- आरोपी भट्‌ट ने मुंबई के ऑटो रिक्शा चालक तक को डांसर तक बताकर कई बार पेमेंट वसूल लिया-
उदयपुर रेंज आईजी ने कोर्ट में कहा कि यह भी जांच में प्रमाणित हुआ है कि आरोपी भट्ट ने ओबर बिलिंग कर वेंडरों के बैंक खातों में पहले पैसा भेजा, फिर खुद व परिजनों के बैंक खातों में वापस लिया व नकद में भी रकम ली। फर्जी वेंडर बनाकर भी फर्जी बिल तैयार कर भुगतान उठाया, मुंबई के एक ऑटो रिक्शा चालक को डांसर तक बताकर कई बार पेमेंट वसूल लिया। जिन वेंडरों ने काम ही नहीं किया, उनके नाम पर भी फर्जी बिल तैयार कराकर भुगतान करा लिए। अपनी करोड़ों रुपयों की पुरानी बाकीयात चुका दी। आईजी ने कहा कि डॉ. अजय मुर्डिया की शिकायत के बाद गहनता से जांच-पड़ताल कर काफी समय बाद 8 नवंबर को एफआईआर दर्ज की गई। 17 नवंबर को को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी व फर्जी वेंडर संदीप को पूछताछ के लिए उदयपुर लाए। आरोपी भट्ट दंपती को 23 व 29 नवंबर को जांच के लिए पेश होने के लिए ईमेल से नोटिस भेजे गए, लेकिन ये पेश नहीं हुए। भट्ट दंपती से 7 दिसंबर को मुंबई में पूछताछ की। इसके बाद 8 दिसंबर को मुंबई से उदयपुर लेकर आए हैं, जो रिमांड पर हैं।

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