ख्वाजा साहब के 814वें उर्स का झंडा बुलंद दरवाजे पर 17 दिसंबर को शाम साढ़े चार बजे चढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही उर्स की अनौपचारिक शुरुआत होगी। झंडा लेकर आने वाला भीलवाड़ा का गौरी परिवार अजमेर पहुंच गया है। चांद रात को यानी 21 दिसम्बर को दरगाह में जन्नती दरवाजा जियारत के लिए खोला जाएगा। रजब का चांद दिखाई देने पर 21 की रात से ही उर्स की विधिवत शुरुआत हो जाएगी, अन्यथा 22 की रात से उर्स की रस्में शुरू होंगी। उर्स कन्वीनर हाजी सैय्यद हसन हाशमी ने बताया-हर साल जमादिल आखिर महीने की 25 तारीख को गरीब नवाज के सालाना उर्स का झंडा बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया जाता है। गरीब नवाज की दरगाह के बुलंद दरवाजे पर सालाना उर्स का झंडा चढ़ने के साथ ही उर्स की अनौपचारिक शुरुआत मानी जाती है। 17 दिसंबर को अस्र की नमाज के बाद जुलूस रवाना होगा। 26 को जुमा, 27 दिसंबर को छठी व 30 दिसंबर को बडे़ कुल की रस्म होगी। 20 को उतारेंगे संदल महान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की मजार पर साल भर चढ़ाया जाने वाला संदल 20 दिसंबर को उतारा जाएगा। खुद्दाम-ए-ख्वाजा यह रस्म अदा करेंगे। 17 दिसंबर को सुबह आस्ताना शरीफ खोलने के साथ ही उर्स की शुरुआत हो जाएगी। रोजाना मजार शरीफ की दिन में होने वाली खिदमत मगरिब की नमाज के बाद होगी । जन्नती दरवाजा 21 को खोला जाएगा। 21 से 28 दिसंबर तक उर्स के दौरान सुबह 4 बजे आस्ताना शरीफ खुलेगा। प्रतिदिन मजार शरीफ की खिदमत होगी। साल में चार बार खुलता है जन्नती दरवाजा सालभर में जन्नती दरवाजा चार बार खोला जाता है लेकिन उर्स में सबसे ज्यादा 6 दिन के लिए खुलता है। इसके बाद एक दिन ईद उल फितर के मौके पर, एक दिन बकरा ईद के मौके पर और एक दिन ख्वाजा साहब के गुरु हजरत उस्मान हारूनी के सालाना उर्स के मौके पर यह दरवाजा खुलता है। परंपरा के अनुसार जन्नती दरवाजा उर्स में आने वाले जायरीन के लिए खोला जाता है। इसी परंपरा के अनुसार यह दरवाजा कुल की रस्म के बाद 6 रजब को बंद कर दिया जाता है। साल भर बांधते हैं मन्नत का धागा जन्नती दरवाजे पर साल भर जायरीन मन्नत का धागा बांधते हैं। जन्नती दरवाजा खुलने के बाद से ही जायरीन की आवक बढ़ जाती है। दरगाह जियारत को आने वाले जायरीन जन्नती दरवाजा से जियारत करने के लिए बेकरार नजर आते हैं। जायरीन सिर पर मखमल की चादर और फूलों की टोकरी लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं। 82 वर्षों से अदा कर रहा गौरी परिवार यह रस्म भीलवाड़ा का गौरी परिवार 82 वर्षों से यह रस्म निभा रहा है। झंडा चढ़ाने की परंपरा 1928 में पेशावर के हजरत सैयद अब्दुल सत्तार बादशाह जान रहमतुल्लाह अलैह ने शुरू की थी। इसके बाद 1944 से भीलवाड़ा के लाल मोहम्मद गौरी का परिवार यह रस्म अदा कर रहा है। गौरी परिवार के लाल मोहम्मद गौरी ने 1944 से 1991 तक और उनके बाद मोइनुद्दीन गौरी ने 2006 तक यह रस्म निभाई। इसके बाद फखरुद्दीन गौरी ये रस्म अदा कर रहे हैं। महान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 811वें उर्स का झंडा बुलंद दरवाजे पर शान औ शौकत से चढ़ाया जाएगा। गाजेबाजे और सूफियाना कलाम के साथ जुलूस के रूप में झंडा दरगाह लाया जाएगा। बड़े पीर की पहाड़ी से तोप से गोले दागे जाएंगे। झंडे की रस्म अदायगी के साथ ही उर्स की अनौपचारिक शुरुआत हो जाएगी। सुरक्षा के रहेंगे पुख्ता इंतजाम ख्वाजा गरीब नवाज के 814वें उर्स में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। उर्स के दौरान सुरक्षा में 5 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा सीबी, सीआईडी, डीएसटी, एसआईटी सहित अन्य एजेंसियां भी एक्टिव रहेंगी। रिकॉर्ड 3.40 करोड़ रुपए मेंं छूटा ठेका, कल से शुरू ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें उर्स के लिए दरगाह में स्थित दोनों देगों का 15 दिन का ठेका इस बार रिकॉर्ड 3.40 करोड़ रुपए से अधिक में छूटा। इस ठेके के लिए करीब 14 घंटे बोली चली थी। इस ठेके की शुरुआत कल यानी 17 दिसंबर से होगी। खादिमों की संस्था अंजुमन सैयदजादगान व अंजुमन शेखजादगान की ओर से संयुक्त रूप से यह ठेका दिया गया है। बता दें कि 813वें उर्स के दौरान देगों का ठेका 2 करोड़ 68 लाख रुपए का था। इस बार करीब 72 लाख रुपए ज्यादा में ठेका छूटा है।


