सरकारी स्कूलों में बच्चों को पहली क्लास में एडमिशन पांच साल की उम्र में मिलेगा। हालांकि यह आदेश फिलहाल आगामी सत्र के लिए है। जबकि पिछले सत्र में आयु सीमा 6 साल की गई थी। लेकिन घटने नामांकन को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आगामी सत्र तक पुराने आदेश को स्थगित कर दिया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन को लेकर शिक्षा विभाग ने यू-टर्न लिया है। कक्षा 1 में प्रवेश के लिए नई शिक्षा नीति के तहत लागू की गई 6 साल की आयु सीमा का प्रावधान फिर से पांच साल कर दिया है। इसके पीछे कारण हैं कि सरकारी स्कूलों में नई आयु सीमा लागू करने के बाद से नामांकन गिरने लगा था। पहले जहां कक्षा 1 में 5 वर्ष की उम्र वाले बच्चे का एडमिशन हो जाता था, वहीं नई शिक्षा नीति के तहत इसे 6 साल कर दिया गया था। जिसके बाद सरकारी स्कूलों में नई कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या कम होने लगी थी। मजबूरी में पेरेंटस निजी स्कूलों की तरफ रूख करने लगे थे। निजी स्कूल 3 से 4 वर्ष के बच्चों को एलकेजी-यूकेजी में प्रवेश दे रहे हैं। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों में तो नामांकन बढ़ा लेकिन सरकारी स्कूलों का घट गया। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 लिए में एंट्री कक्षा प्रथम में प्रवेश के आयु निर्धारण डेट के संबंध में एनईपी 2020 के अनुसार 6 वर्ष से – कम उम्र के बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश नहीं दिए जाने एवं 5 वर्ष की आयु के बालकों को बाल वाटिका में शामिल किए जाने के निर्देश है। चूंकि यह समय सीमा पिछले वर्ष ही अपनाई गई है और पूरे राज्य में अभी भी बाल वाटिकाएं बननी बाकी हैं। ऐसे में 3 वर्ष की पूर्व प्राथमिक शिक्षा पूरी कर चुके किसी भी बच्चे को शामिल करने के लिए 6 वर्ष की समय सीमा में 31 जुलाई, 2026 तक छूट प्रदान की जाती है। गिरते नामांकन से पीछे खींचे कदम
विभाग की ओर से पहले कक्षा एक में दाखिले की आयु सीमा 6 वर्ष कर दी थी। इधर, पेरेंटस अपने बच्चों को घर पर तो बैठाकर नहीं रख सकते। उन्हें स्कूल में एडमिशन करवाना पड़ता है क्योंकि साल का गेप लग जाता है। इसी वजह से पेरेंटस निजी स्कूलों की तरफ रुख कर गए। एक बार निजी में एडमिशन के बाद बच्चे या पेरेंटस भी दोबारा सरकारी स्कूल में एडमिशन नहीं करवाते। फिलहाल एक साल के लिए ये परिवर्तन किया गया है लेकिन इससे कक्षा एक में नामांकन बढ़ने की उम्मीदें है। शिक्षक संगठनों ने बाल वाटिका को प्रभावी ढंग से संचालित करने, आयु सीमा में संशोधन की मांग उठाई थी। इन्हीं के दबाव और लगातार गिरते नामांकन को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आदेश में संशोधन करते हुए एक वर्ष के लिए पुरानी आयु सीमा को ही लागू रखने का निर्णय लिया है। बाल वाटिकाएं यानी प्री स्कूल को करेंगे मजबूत
सरकारी स्कूलों में भी निजी स्कूलों की तरह प्री स्कूलिंग करवाई जानी है। इसके लिए बाल वाटिकाएं बननी है। अभी तक सरकारी स्कूलों में ये नहीं बनी है। ऐसे में शिक्षा विभाग के पास अब एक साल का समय और है कि इन बाल वाटिकाओं को मजबूत कर सके और पूरी तैयारी के लिए बच्चों का इनमें एडमिशन हो सके। वर्तमान सत्र में भी बढ़ा है नामांकन
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस बार नए सत्र में सरकारी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया 1 अप्रेल से शुरू की जाएगी। पिछले साल कक्षा-1 में दाखिले की आयु सीमा 6 वर्ष की गई थी। जिसका असर नामांकन पर भी दिखा। विभाग ने इसी समस्या को देखते हुए सकारात्मक कदम उठाया और आयु सीमा में 31 जुलाई 2026 तक छूट प्रदान की है। जिसके तहत अब 5 वर्ष के बालकों को कक्षा-1 में दाखिला मिल सकेगा। इससे प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में नामांकन में वृद्धी होगी। हालांकि, वर्तमान सत्र में भी सरकारी विद्यालयों में नामांकन में बढ़ोतरी हुई है।


