हाईकोर्ट ने अतिरिक्त काम का भुगतान रोकने को गलत ठहराया:1.25 करोड़ के भुगतान का आदेश, 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा

ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY) के तहत कराए गए अतिरिक्त विद्युतीकरण कार्य का भुगतान रोकने को अनुचित करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभाग के निर्देशों पर किए गए अतिरिक्त कार्य का भुगतान न करना मनमाना है, खासकर तब जब उसका पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी हो चुका हो। बता दें कि याचिकाकर्ता कंपनी को गुना जिले में इस योजना के तहत विद्युतीकरण कार्य का ठेका मिला था। कार्य निष्पादन के दौरान, अधिकारियों के निर्देश पर कंपनी ने मूल अनुबंध के अतिरिक्त 5 नए 33/11 केवी सब स्टेशन और 218 किलोमीटर एलटी लाइन का निर्माण किया। इस अतिरिक्त कार्य की लागत लगभग 1.25 करोड़ रुपए थी। यह अतिरिक्त कार्य समय पर पूरा किया गया था और 25 नवंबर 2019 को इसका पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी हो गया था। हालांकि, इसके बावजूद कंपनी को राशि का भुगतान नहीं किया गया और बाद में परियोजना बंद कर दी गई।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि अतिरिक्त कार्य कराया गया था और विभाग को उसका लाभ भी मिला। कोर्ट ने ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर 1.25 करोड़ रुपए की राशि जारी करे। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होता है, तो कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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