रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए ट्रेनों में पुराने परंपरागत कोच (आईसीएफ) की जगह नई तकनीक वाले लिंक हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोच लगाए हैं। इनमें सीटें ज्यादा हैं और कपलिंग (कोच के बीच का जोड़) तकनीक आधुनिक है। ऐसे में हादसे के दौरान कोच एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते हैं, लेकिन रेलवे की ये सुविधा यात्रियों के लिए परेशानी बनी हुई है। दरअसल, रेलवे ने नई तकनीक तो विकसित कर ली, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किए। यानी कोच तो नई तकनीक वाले लगा दिए, लेकिन प्लेटफॉर्म पर लगे हुए कोच इंडिकेशन बॉक्स पुराने ही हैं, जिससे कोच जहां डिस्प्ले होता है, वहां नहीं आता। नए कोच पुराने से 2 मीटर लंबे, इंडिकेशन बॉक्स पुरानों के हिसाब से ही लगे रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुराने आईसीएफ रैक के कोच करीब 22 मीटर लंबे होते हैं। ऐसे में इन कोच के रैक वाली ट्रेनों में 24 कोच होते हैं, जबकि नए एलएचबी रैक के कोच 24 मीटर लंबे होते हैं, जिससे हर श्रेणी के कोच में एक कैबिन (6 से 8 सीट) बढ़ जाता है। इस रैक वाली ट्रेन में अधिकतम 22 कोच होते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन एक्सपर्ट अजय कश्मीरी और नीरज चतुर्वेदी बताते हैं कि अगर तकनीकी रूप से देखा जाए तो नए रैक में सीटों की संख्या पुराने की अपेक्षा कम हो जाती है। उधर, प्लेटफॉर्म पर जो कोच इंडिकेशन बॉक्स लगे हुए हैं, वो पुराने रैक के हिसाब से ही लगे हुए हैं। ऐसे में इंडिकेशन बॉक्स में जो कोच डिस्प्ले किया जाता है, कोच वास्तविकता में उससे पीछे आता है। इसमें सबसे अधिक परेशानी बच्चे, महिला और बुजुर्ग यात्रियों को होती है। क्योंकि अधिकांश स्टेशनों पर किसी भी ट्रेन का औसतन स्टॉपेज 2-3 मिनट का होता है। ऐसे में उन्हें लगेज के साथ ट्रेन पकड़ने में परेशानी होती है। कई बार तो ये हादसे की बड़ी वजह बन जाता है। रेलवे के पास ICF कोच की कमी, क्योंकि रैक कुंभ स्पेशल चलाने दूसरी रेलवे को भेजे
ट्रेन ऑपरेशन एक्सपर्ट आशीष पुरोहित ने बताया कि रेलवे ने अब आईसीएफ कोच बनाना बंद कर दिया। एलएचबी कोच का उत्पादन किया जा रहा है। उत्तर-पश्चिम रेलवे की खुद की 250 से अधिक ट्रेनें जयपुर सहित चारों मंडलों से अलग-अलग राज्यों के लिए संचालित होती हैं। इनमें से 100 ट्रेनें एलएचबी से चलाई जाती हैं, 150 आईसीएफ रैक से चल रही हैं। पिछले दिनों लीलण एक्सप्रेस में आईसीएफ एसी कोच नहीं होने से यात्रियों को नॉन एसी कोच में भेजा गया था। दरअसल, रेलवे के पास आईसीएफ कोच की भारी कमी है। वहीं कुछ आईसीएफ रैक दूसरे जोनल रेलवे को लोन पर दिए गए हैं, ताकि उनके यहां से महाकुंभ के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जा सके। अगर इंडिकेशन बॉक्स में हर दूसरे-तीसरे कोच को स्किप करके डिस्पले किया जाए तो लोगों को होने वाली परेशानी का समाधान हो सकता है।


