नाटक आषाढ़ का एक दिन में कवि कालिदास के संवाद व भावपूर्ण अभिनय से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

भास्कर न्यूज | अलवर समय किसी का इंतजार नहीं करता। संस्कृत साहित्यकार एवं विद्वान कालीदास और मल्लिका की प्रेम कथा पर आधारित मोहन राकेश के लिखे नाटक आषाढ़ का एक दिन में साहित्यकार कालीदास ने संवाद को बोला तो दर्शक भावुक हो गए। रंग संस्कार थियेटर ग्रुप द्वारा आयोजित अलवर रंगम नाट्य महोत्सव में भोपाल के कारवां ग्रुप की ओर से हिंदी साहित्य का पहला आधुनिक नाटक माने जाने वाले नाटक का नज़ीर कुरैशी के निर्देशन में मंचन किया गया। 110 मिनट की अवधि के नाटक ने दर्शकों हो हिलने तक नहीं दिया। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय ने नाटक के रोमांच को अंत तक बनाए रखा। अभिनय इन्होंने किया : नाटक में कालीदास- प्रेम सावलानी, मल्लिका -श्रुति सिंह, अंबिका-ज्योति सावरीकर, प्रियंगुमंजरी- मंजू रैक्वार, विलोम- उबेदुल्लाह खान, मातुल- प्रवीन नेमा, अनुस्वर- जावेद खां, अनुनासिक-शकिर उल रहमान, दंतुल व निक्षेप की भूमिकाएं शैफुल खा ने की। आज की प्रस्तुति अलवर रंगम में शुक्रवार को शाम 6:30 बजे मीराकांत के लिखे और सुभाष गुप्ता द्वारा निर्देशित नाटक गली दुल्हन वाली का मंचन प्ले ऑफ शिवा ग्रुप, तेलंगाना की ओर से किया जाएगा। नाटक की कहानी नाटक महाकवि कालिदास और उनकी प्रेमिका मल्लिका के प्रेम प्रसंग से शुरू होती है। इनमें मल्लिका की मां कालीदास को स्वार्थी बताती है। फिर कालिदास के जीवन में वह मोड़ आता है, जब वे उज्जैन के राजदरबार में जाने का निर्णय लेते हैं। राज कवि बनने के बाद कालीदास गांव में वापस नहीं आते तो ग्रामीणों के बीच विभिन्न तरह की चर्चाएं होती हैं। इसी दौरान नाटक में कवि के अंतर्द्वंद्व और उनके जीवन की विडंबनाओं को बड़ी गहराई से प्रस्तुत किया गया। मल्लिका के चरित्र के माध्यम से एक ऐसी नारी की व्यथा को दिखाया गया है जो अपने प्रिय की प्रतिभा को पहचानती है और उसे ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती है, भले ही इसका अर्थ उससे बिछड़ना ही क्यों न हो। साथ ही इसमें कला और कलाकार के जीवन के यथार्थ को भी दर्शाया गया है। इस बीच एक दिन कालीदास गांव में मल्लिका से विवाह करने वापस आते हैं। तब तक मल्लिका का विवाह हो चुका होता है। कालीदास अंतिम दृश्य में बोलते है कि समय किसी का इंतजार नहीं करता।

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