भिंड नगर पालिका में संभल योजना और कर्मकांड मंडल में हुए भ्रष्टाचार को लेकर दर्ज एफआईआर पर अब नया मोड़ आ गया है। इस मामले में आरोपित पूर्व सीएमओ वीरेंद्र तिवारी ने भिंड कलेक्टर, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपनी भूमिका पर सफाई देते हुए जांच प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और दोषपूर्ण बताया है। पूर्व सीएमओ का आरोप पूर्व सीएमओ वीरेंद्र तिवारी ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने ही इस भ्रष्टाचार की शिकायत पिछले साल भिंड कोतवाली थाना प्रभारी से की थी। इसके बावजूद उन्हें आरोपी बनाया गया। तिवारी के अनुसार, उन्होंने योजना में गड़बड़ियों की जानकारी देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। “प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन” तिवारी ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले न तो उनका पक्ष सुना गया और न ही उच्चस्तरीय जांच कराई गई। उन्होंने कहा कि मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों से होनी चाहिए थी, लेकिन यह जिम्मेदारी कनिष्ठ श्रमिक निरीक्षकों को दी गई, जो उनकी प्रतिष्ठा के खिलाफ है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुआ भुगतान तिवारी ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान एक प्रकरण में फर्जी दस्तावेजों के जरिए भुगतान का मामला सामने आया था। उन्होंने इसकी शिकायत नगर निरीक्षक से की थी और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके बावजूद, उनकी ही भूमिका पर सवाल उठाकर उन्हें आरोपी बना दिया गया। “सीएमओ का काम निर्धारित” तिवारी के मुताबिक, हितग्राही के दस्तावेजों की जांच-पड़ताल शाखा प्रभारी द्वारा की जाती है। सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्रक्रिया कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा पूरी की जाती है। सीएमओ का काम केवल अनुमोदन तक सीमित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उनकी जानकारी के दस्तावेजों में छेड़छाड़ की गई और उन्हें फंसाने की कोशिश की गई। “मनमानी कार्रवाई से तोड़ा मनोबल” तिवारी ने कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होने के बावजूद उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई न केवल एकतरफा थी, बल्कि उनके मनोबल को तोड़ने के लिए की गई। उन्होंने मांग की कि मामले में उचित एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।


