सितंबर 2025 में एमवाय अस्पताल इंदौर में चूहों के कुतरने से दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। इसके कुछ दिनों बाद ही जबलपुर नेताजी सुभाषचंद्र बोल मेडिकल काॅलेज में भी मानसिक रोग विभाग में चूहे निकल आए। इन चूहों ने मरीज के पैर कुतर दिए। आनन-फानन में स्वस्थ्य विभाग ने पेस्ट कंट्रोल किया। माना जा रहा था कि इंदौर और जबलपुर मेडिकल काॅलेज में हुई घटना से विभाग सीख लेगा पर ऐसा नहीं हुआ। जिला अस्पताल जबलपुर में सोमवार की तड़के हड्डी वार्ड में भर्ती मरीज और उसके खाने के आसपास चूहे नजर आए। वीडियो सामने आया तो हड़कंप मच गया। सिविल सर्जन ने पेस्ट-कंट्रोल करने वाली कंपनियों को तुंरत कार्य करने के निर्देश दिए। सीवर लाइन टूटी-यही है रास्ता
जिला अस्पताल जबलपुर की पुरानी बिल्डिंगों को तोड़कर नए भवन बनाए जा रहे हैं। जेसीबी से मलबा हटाते समय हड्डी वार्ड के पास की सीवर लाइन टूट गई, जो कि चूहों के आने-जाने का रास्ता बन गया। बीते कुछ दिनों से अधिकतर चूहे वार्डों में चहलकदमी करते नजर आ रहे हैं। सिविल सर्जन डाॅ. नवीन कोठारी ने इस बात को स्वीकार किया कि वार्ड में चूहे घूम रहे हैं। सिविल सर्जन ने वार्डों में चूहे होने को लेकर अजीबोगरीब दलील दी है। उनका कहना है कि अस्पताल के निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके चलते समस्या आ रही है। लोक निर्माण विभाग को भी इस घटना से अवगत करवाया गया है, क्योंकि अगर कार्य करते समय वार्डों में कहीं छेद या दरारें हो गई है, तो उसे ठीक करवाया जाएगा, हो सकता है उसी से चूहे वार्ड के अंदर घुस रहे हैं। वाइब्रेशन से बिल्डिंग में आई दरारें
सिविल सर्जन डाॅ. नवीन कोठारी ने बताया कि पुराने भवनों को तोड़कर नया बनाया जा रहा है। तेजी से काम चल रहा है। हो सकता है कि बड़ी-बड़ी मशीनों की वाइब्रेशन से उस वार्ड में दरारें आ गई हो, जहां पर मरीज भर्ती हैं। उनका कहना है कि आर्थोपेडिक और आपरेशन थिएटर के बगल से ही निर्माण कार्य चल रहा है। वार्डों में परिजन खाते हैं खाना
जिला अस्पताल में चूहे के घुसने के मामले को लेकर दैनिक भास्कर की टीम ने पड़ताल की। यहां देखा कि अधिकतर वार्डों में मरीज के परिजन बेड के बगल से ही बैठकर खाना खाते हैं। ऐसी स्थिति में अनाज गिरने पर चूहे, काॅकरेज का आना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं मरीज के पास ही खुला खाना भी रखा रहता है। जिसके चलते चूहे मरीज तक पहुंच रहे हैं। एक तस्वीर ऐसी भी सामने आई, जहां पर एक महिला मरीज के बगल में बैठकर खाना खा रही थी। उसका कहना था कि अगर अनाज जमीन पर गिरेगा तो उसे उठा लेंगे। 300 बेड के अस्पताल में नहीं है डायनिंग रूम
दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि 300 बेड के जिला अस्पताल में ना ही डायनिंग रूम और ना ही डायनिंग टेबल है। जिस वजह से अधिकतर परिजन मरीजों के पास में ही या फिर वार्ड के भीतर बैठकर खाना खाते हैं, और वहीं पर अपना खुला भोजन रखते है, जो कि चूहों को निमंत्रित करता है। नियमानुसार हर अस्पताल में अंटेडर के खाना खाने की अलग व्यवस्था होती है, जो कि अभी जिला अस्पताल में नहीं है। हालांकि नई बन रही बिल्डिंग में डायनिंग रूम की बनवाया जा रहा है। घटना के बाद किया गया पेस्ट कंट्रोल
हड्डी वार्ड में चूहे होने की खबर सिविल सर्जन से लेकर सीएमएचओ सहित कलेक्टर तक भी पहुंची। आनन-फानन में पेस्ट कंट्रोल करने वाली एजेंसी के कर्मचारियों को अस्पताल बुलाया गया और सभी वार्डों में पेस्ट कंट्रोल किया गया। बताया जाता है कि अनुबंधित एजेंसी हर 15 से 20 दिनों मे पेस्ट कंट्रोल करती है। 8 दिसंबर को भी पूरे अस्पताल में यह कार्य किया गया है। इसके साथ ही मरीजों के परिजनों को यह भी हिदायत दी जा रही है कि वार्ड के अंदर बिल्कुल भी भोजन ना करे। जमीन के भीतर से निकल रहे चूहे
जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि यह सही है कि हाल ही के दिनों में जिला अस्पताल में चूहे निकलने की घटना सामने आई है। पुरानी बिल्डिंग को जमींदोज करते हुए नए भवन बनाए जा रहे हैं। जिस वजह से बिल से चूहे निकलकर बाहर आए हैं। स्वस्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि रेट किल की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा चूहों को पकड़ने वाली मशीन भी लेने को कहा है। चूहों के वार्ड में आने की एक वजह यह भी है कि मरीजों के परिजन वहीं पर खाना खाते हैं। बाद में बचा हुआ छोड़ देते हैं। जिस वजह से चूहे आते हैं। मरीजों के परिजनों को समझाइश दी जा रही है कि वार्ड के बाहर खाना खाए। यह खबर भी पढ़ें…
मरीज असुरक्षित, हड्डी वार्ड में बेड से टिफिन तक चूहे जबलपुर मेडिकल कॉलेज के बाद अब जबलपुर जिला अस्पताल (विक्टोरिया) से भी चूहों के आतंक का मामला सामने आया है। यहां के हड्डी (अस्थि) वार्ड में तीन चूहे मरीज के बेड से लेकर टिफिन तक घूमते नजर आ रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…


