अवैध खदानों में मिले हीरे कार्यालय नहीं पहुंच रहे:जहां निकला 32 कैरेट का हीरा, पास में ही लगा लो खदान; दो इंस्पेक्टर के भरोसे 20 किमी क्षेत्र

पन्ना के दक्षिण-पश्चिम में 20 किमी से अधिक क्षेत्र में फैले हीरा क्षेत्र की मॉनीटरिंग के लिए दो हीरा इंस्पेक्टर हैं। इनमें से एक हीरा पारखी है, जिसे इंस्पेक्टर का प्रभार दिया गया है। तीन सिपाही हैं, जो 6 महीने में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। …और पाताल तक जमीन खोदने के बाद मिलता क्या है? : पन्ना हीरा कार्यालय के मुताबिक, अभी तक यहां 46 लोगों को दस कैरेट से अधिक का हीरा मिल चुका है। साल 2024 में 3 लोगों को 32, 19 और 16 कैरेट का हीरा मिला है। हालांकि अवैध खदानों में मिलने वाले हीरे अभी भी हीरा कार्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। हीरा कार्यालय में हीरा जमा करने पर 11.5% रॉयल्टी और 1% टीडीएस काटकर नीलामी में मिली राशि हीरा लाने वाले को दी जाती है। हालांकि अवैध खदानों से मिलने वाले हीरे का यहां बड़ा कारोबार है। खदान ठेकेदारों के मुताबिक हीरा मिलने की सूचना मिलते ही व्यापारी और दलाल मौके पर पहुंच जाते हैं और नकद भुगतान कर हीरा ले जाते हैं। हालांकि, हीरा कार्यालय ने हीरे की अवैध बिक्री रोकने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं। इसके अलावा हीरा लाने वाले को तत्काल 50 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक नकद राशि दी जाती है, ताकि नीलामी से पहले कुछ राशि मिल सके। सरकार 4X4 का पट्टा देती है, हमें 200X200 में खदान चाहिए बनिहां गांव में खेत मालिक उमेश पाल की 21 एकड़ खेती की जमीन है। इस पर 50 से अधिक लोगों ने खदान लगा रखी है। उमेश बताते हैं कि हीरा निकलने पर वह 30% रकम लेते हैं। उनकी बताई जगह पर, जितना गहरा चाहो, खुदाई करो। कानूनी प्रक्रिया से बचने वह हीरा खदान के पट्‌टे की फोटोकॉपी दे देते हैं। एक महीने पहले जिस खदान से 32 कैरेट का हीरा निकला, उमेश ने 5 लाख रुपए लेकर वहीं, खदान लगाने के लिए जगह बताई। सरकोहा में एक खेत में 4 साल से खदान लगा रहे ठेकेदार विक्रम को एक महीने पहले ही सवा कैरेट का हीरा मिला था। विक्रम के मुताबिक, सरकार जो आठ गुणा आठ मीटर का पट्‌टा देती है, उससे काम नहीं चलता, उसने 200 गुणा 200 मीटर में खदान लगाई है। हर हफ्ते 50 हजार से अधिक मजदूरी देनी पड़ती है। मजदूरों की देखरेख 4 लोग करते हैं। । विक्रम ने खेत में खदान लगाने के लिए खेत मालिक से एग्रीमेंट किया है। इसके मुताबिक कीमत का 25% उसे देना होगा। छतरपुर से आए रामू आदिवासी ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले नदी से छोटा हीरा मिला है, पर इसकी परख नहीं हो सकी है। रुंझ नदी पर डैम बन रहा है। इसका 70% काम पूरा हो चुका है। डैम के पूरा होने के बाद हीरा निकालने वाला नदी का ये पूरा क्षेत्र बैक वाटर में डूब जाएगा।

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