सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में करीब दो दर्जन गांव आज पर्यंत विद्युत विहीन हैं। इन गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए कई बार सर्वे भी हो चुके हैं। विद्युतीकरण नहीं होने से नाराज 15 से अधिक गांवों के लोगों ने 15 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल पर बैठे सरपंच संघ के अध्यक्ष सहित तीन लोगों की ठंड लगने से तबीयत बिगड़ गई है। बिजली के लिए ग्रामीणों की हड़ताल की स्थिति को पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सूरजपुर जिले के ओड़गी ब्लॉक का चांदनी-बिहारपुर इलाका वनांचल क्षेत्र है। यहां के दो दर्जन गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची। पूरे इलाके में जंगल होने के कारण वनविभाग से बिजली लाइन के लिए अनुमति नहीं मिली थी। इस क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए सर्वे हुए और वन विभाग से अनुमति भी मिल गई है। विद्युतीकरण के लिए राशि स्वीकृत नहीं होने के कारण विद्युतीकरण का काम नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
इलाके के करीब दो दर्जन गांवों में वर्ष 2013 में क्रेडा के माध्यम से सोलर लाइट लगाई गई थी। सोलर प्लांट स्थापित कर लोगों के घरों में बिजली लाइन खींचा गया था। करीब दो वर्ष बाद इन प्लांटों में खराबी आने लगी और बैटरी भी खराब हो गई। कुछ समय बाद ये इलाके फिर से लालटेन के सहारे हैं। बिजली लाइन की मांग पूरी नहीं होने से आक्रोशित 15 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने 15 दिसंबर से चांदनी बिहारपुर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक विद्युतीकरण के लिए लिखित आश्वासन नहीं मिलता वे नहीं हटेंगे। सरपंच संघ अध्यक्ष सहित तीन बीमार
आंदोलनकारी ग्रामीण पंडाल में ही रात बिता रहे हैं। सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड के बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे करौटी ए के सरपंच गज मोचन सिंह सहित तीन ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं। तीनों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
इन गांवों में नहीं पहुंची बिजली ओड़गी ब्लॉक में 74 पंचायतें हैं। इनमें ओड़गी के करीब दो दर्जन पंचायतों में बिजली नहीं पहुंची। है। इनमें कोल्हुआ, मोहली, खोरिज, बैजनपाट, लूल, भूंडा, तेलाइईपाट, रसौकी, उमझर, रामगढ़, कछवारी, जुड़वनिया, नवडीहा, कछिया, मोहरसोप, बछियारा, करौटी ए, खैरा, चोंगा, कैलाशनगर, बांक, असुरा सहित अन्य गांव शामिल हैं। ओड़गी की सरहद मध्यप्रदेश से लगी हुई है। सरहद के उस पार सिंगरौली के बड़गड़ में बिजली है। ओड़गी के अवंतिकापुर तक बिजली पहुंची है। 500 मीटर दूर कोल्हुआ में बिजली नहीं है। लोगों ने कहा कि सरकार अनुमति दे तो वे स्वयं चंदा कर बिजली गांव तक ला सकते हैं। सिंहदेव बोले-स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण
ग्रामीणों के आंदोलन को लेकर पूर्व डिप्टी सीएम ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सिंहदेव ने लिखा है-
सरगुजा संभाग के बिहारपुर क्षेत्र में 17 से अधिक ग्राम पंचायत आज भी बिजली विहीन रह कर अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। इन गांवों के बच्चे आज भी लालटेन जला कर पढ़ते हैं, बुजुर्ग रोशनी की राह देखते हैं और परिवार अंधेरे के साए में रात काटते हैं। बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए ग्रामीणों का सड़कों पर उतरना सरकार की असंवेदनशीलता और विफलता का सबसे दर्दनाक प्रमाण है। ऐसे हालात में सरकार अपने 2 साल के “सुशासन” का जश्न आखिर किसके लिए मना रही है? जब नागरिकों से उनका बुनियादी अधिकार छीना जा रहा हो, तब विकास के दावे खोखले और अमानवीय लगते हैं।


