अजमेर दरगाह में उर्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य संवैधानिक पदों की ओर से चढ़ने वाली चादरों पर रोक लगाने की याचिका पर लिंक कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को सुनवाई करने का आदेश दिया। अजमेर दरगाह में संकटमोचन शिव मंदिर होने का वाद पेश करने वाले हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने ये याचिका पेश की थी। आज सुनवाई के दौरान भी वे मौजूद रहे। कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सिविल लाइन थाना प्रभारी शंभू सिंह भी अतिरिक्त जाब्ते के साथ कोर्ट परिषद में तैनात रहे। बता दें कि 10 दिसंबर को इस याचिका पर लिंक कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला रिजर्व रखा था। विष्णु गुप्ता बोले-विपक्ष की आपत्ति का जवाब दिया
मीडिया से बातचीत में विष्णु गुप्ता ने कहा- प्रधानमंत्री सहित अन्य संवैधानिक पदों पर चादर को लेकर लगाई गई याचिका पर सुनवाई हुई। इस चादर को अल्पसंख्यक मंत्रालय लेकर पहुंचता है। इससे हर साल एक साक्ष्य और तैयार हो जाते हैं। इससे शिव मंदिर का दावा कमजोर हो जाता है। चादर पर रोक लगाने को लेकर पहले भी दो बार सुनवाई हुई। विपक्ष इस मामले को लंबा खींचने के लिए लगातार कुछ अडंगे लगा रहे हैं। विपक्ष ने जो आपत्ति लगाई उसका जवाब दिया गया। कल वापस सुनवाई होगी। 22 को हो सकती है पीएम की चादर पेश
ख्वाजा गरीब नवाज के 814 में उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री की ओर से 22 दिसंबर को चादर पेश की जा सकती है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरेन रिजिजू इस चादर को लेकर आएंगे। इस बात के संकेत मंत्रालय की ओर से दरगाह कमेटी को दिए गए हैं। हालांकि अभी तक कार्यक्रम फाइनल नहीं हुआ है। चांद दिखाई देने पर 22 दिसंबर को उर्स का पहला या दूसरा दिन रहेगा। यानी उर्स के शुरुआत में ही पीएम की ओर से चादर पेश की जा सकती है। दरगाह से जुड़े पक्षों का कहना है कि चादर को लेकर रहने वाली प्रक्रिया को लेकर जानकारी मांगी गई थी। वो उपलब्ध करा दी गई है। पिछले उर्स में रिजिजू लाए थे पीएम की चादर
ख्वाजा गरीब नवाज के 814वें उर्स का झंडा आज बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही उर्स की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। उर्स के मौके पर हर साल पीएम की ओर से चादर पेश की जाती रही है। जायरीन के नाम पीएम द्वारा भेजे जाने वाले पैगाम को भी दरगाह से पढ़कर सुनाया जाता है। 813वें उर्स के मौके पर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरेन रिजिजू खुद चादर लेकर दरगाह पहुंचे थे। उनके साथ भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय व स्थानीय पदाधिकारी भी थे। दरगाह कमेटी, दरगाह दीवान और खादिमों की ओर से उनका इस्तकबाल किया गया था।
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