ब्याज पर पैसे देकर करोड़पति बना केशरवानी:पैसे नहीं चुकाने पर लोगों की गाड़ी-प्रॉपर्टी पर कब्जा; सागर में छापे में मिली 150 करोड़ की प्रॉपर्टी

सागर में बीड़ी और कंस्ट्रक्शन कारोबारी केशरवानी पर आयकर की छापेमारी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राजेश केशरवानी और बृजेश केशरवानी मनी लेडिंग (ब्याज पर उधार देना) का काम करते थे। इसी की बदौलत करोड़पति बने हैं। दोनों भाई पैसा नहीं चुकाने वालों की गाड़ियां और प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लेते थे। आयकर छापे में करीब 150 करोड़ की प्रॉपर्टी के दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इनमें 100 करोड़ की संपत्ति बेनामी है। केशरावानी परिवार रियल एस्टेट और अन्य बिजनेस में भी शामिल है। बता दें कि आयकर विभाग की टीम ने तीन दिन पहले सागर में तीन ठिकानों पर छापे मारे थे। यह छापेमारी केशरवानी परिवार और पूर्व विधायक हरवंश सिंह राठौर के परिवार परिसर में की गई थी। टीम को फर्म में साझेदारी करने वाले पूर्व विधायक हरवंश सिंह राठौर के भाई और परिजन परिजनों के यहां से बड़ी मात्रा में सोना और कैश मिला था। 140 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का अनुमान
आयकर जांच में केशरवानी के घर से ही 140 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का अनुमान है। इसमें से 100 करोड़ की प्रॉपर्टी बेनामी रूप में सामने आई है। इसकी पड़ताल कर बेनामी प्रॉपर्टी के मालिकों की जानकारी जुटाई जा रही है। केशरवानी परिवार के यहां मिले सात फार्च्यूनर, क्रिस्टा, इनोवा समेत अन्य लग्जरी वाहन मनी लेंडिंग के ही परिणाम बताए जा रहे हैं। ये सभी वाहन केशरवानी के परिजन एक साल से अधिक समय से चला रहे थे। केशरवानी के खिलाफ बिजली चोरी का प्रकरण दर्ज होने की भी बात सामने आई है। पूर्व एमएलए के भाई के यहां से सोना, कैश बरामद
आयकर विभाग ने केशरवानी एंड एसोसिएट्स के यहां छापेमारी के दौरान पूर्व बीजेपी एमएलए हरवंश राठौर के आवास पर भी छापेमारी की थी। इनके यहां छापेमारी केशरवानी एसोसिएट्स के साथ एक फर्म में साझेदारी के चलते की गई थी। बताया जाता है कि हरवंश सिंह राठौर और उनकी पत्नी के घर से टीम को कुछ नहीं मिला। लेकिन उनके भाई कुलदीप राठौर और परिजनों के यहां से गोल्ड और करोड़ों रुपए कैश मिले हैं। इसके आधार पर 10 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का अनुमान राठौर परिवार पर भी लगाया जा रहा है। केशरवानी और राठौर परिवार के यहां की गई छापेमारी में कुल 150 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का अनुमान आयकर विभाग ने लगाया है जो जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक रूप में सामने आ सकेगा।

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