नागौर के प्रसिद्ध हैंड टूल्स उद्योग के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की पुरजोर मांग और व्यक्तिगत प्रयासों के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस क्षेत्र के लघु और कुटीर उद्योगों को बड़ी रियायत दी है। केंद्र सरकार ने नागौर के हैंड टूल्स क्लस्टर में तैयार होने वाले प्रमुख उत्पाद ‘कॉम्बिनेशन साइड कटिंग प्लायर’ को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनिवार्य आदेश से एक वर्ष के लिए मुक्त करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से न केवल नागौर बल्कि देशभर के सूक्ष्म और लघु उद्योग जगत को संजीवनी मिली है। इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब अक्टूबर माह में नागौर के हैंड टूल्स निर्माताओं ने सांसद हनुमान बेनीवाल से मुलाकात कर अपनी पीड़ा जाहिर की थी। उद्यमियों ने बताया था कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के नए फरमान के तहत बीआईएस मानकों की अनिवार्यता से इस पारंपरिक कुटीर उद्योग पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। स्थानीय कारीगरों की मांग पर सांसद बेनीवाल ने तुरंत संज्ञान लिया और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखने के साथ-साथ उनसे व्यक्तिगत मुलाकात कर नागौर के इस ऐतिहासिक उद्योग की महत्ता से अवगत कराया। नागौर का हैंड टूल्स उद्योग अपने आप में गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। साल 1911 में भारत में पहली बार हैंड टूल्स और प्लायर जैसे औजारों का निर्माण नागौर की धरती पर ही शुरू हुआ था। बिना किसी विशेष सरकारी मदद के यहां के हुनरमंद कारीगरों ने अपनी मेहनत और कौशल के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई और चीनी औजारों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद बाजार में डटे रहे। सांसद बेनीवाल ने इस सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनका अगला लक्ष्य उद्योग संबंधी संसद की स्थाई समिति का दौरा नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में करवाना है, ताकि यहां के स्थानीय उद्योगों को एमएसएमई (MSME) योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं और तकनीकी सहायता का पूरा लाभ मिल सके और यह उद्योग और अधिक ऊंचाइयों को छू सके।


