4 बच्चों को चढ़ाया ‘एड्स’ वाला खून…हो गए HIV पॉजिटिव:4 महीने बाद भी नहीं मिला डोनर; सभी की उम्र 8 से 11 साल के बीच

सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की लापरवाही से थैलेसीमिया से पीड़ित 4 बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया। मामला चार महीने पुराना बताया जा रहा है, जिसका खुलासा अब हुआ है। चारों बच्चों की उम्र 8 से 11 साल के बीच है। थैलेसीमिया से पीड़ित इन बच्चों को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। आईसीटीसी में कराई गई जांच में यह सामने आया कि पहले सभी बच्चे एचआईवी नेगेटिव थे, लेकिन बाद की जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद संक्रमण के सोर्स को लेकर जांच शुरू की गई। मामले में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मैंने जांच रिपोर्ट मंगाई है। इस बात की भी जांच कराई जा रही है कि बच्चों को सरकारी अस्पताल के अलावा और कहीं ब्लड ट्रांसफ्यूजन तो नहीं किया गया है। 6 सदस्यीय टीम 7 दिन में देगी जांच रिपोर्ट
मामले में हेल्थ कमिश्नर तरुण राठी ने 6 सदस्यीय जांच टीम बनाई है। इसमें रीवा के हेल्थ डिपार्टमेंट के रीजनल डायरेक्टर डॉ. सत्या अवधिया, स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की डिप्टी डायरेक्टर रूबी खान, भोपाल एम्स के ब्लड ट्रांसफ्यूजन एक्सपर्ट डॉक्टर रोमेश जैन, बीएमएचआरसी की सीनियर ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एंड ब्लड सेंटर अधिकारी डॉ. सीमा नवेद, खाद्य एवं औषधि प्रशासन होशंगाबाद के वरिष्ठ औषधि निरीक्षक संजीव जादौन और ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका चौबे को जांच टीम में शामिल किया गया है। यह राज्य स्तरीय समिति 7 दिन में अपनी जांच कर रिपोर्ट पेश करेगी। बार-बार ट्रांसफ्यूजन में ज्यादा खतरा
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल ने बताया कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को कई बार ब्लड चढ़ाया जाता है। किसी बच्चे को 70, किसी को 80 और किसी को 100 बार तक ट्रांसफ्यूजन हो चुका है। ऐसे मामलों में एचआईवी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। इसी आधार पर यह जांच की जा रही है कि संक्रमण किस ट्रांसफ्यूजन के दौरान हुआ। अलग-अलग जगहों से लिया गया था ब्लड
डॉ. पटेल के अनुसार, इन बच्चों को केवल जिला अस्पताल से ही नहीं, बल्कि बिरला अस्पताल (रीवा) और मध्यप्रदेश के अन्य जिलों से भी ब्लड उपलब्ध कराया गया था। ऐसे में सभी संबंधित ब्लड डोनरों की पहचान कर जांच की जा रही है। बच्चों के माता-पिता की भी जांच कराई गई है और वे एचआईवी नेगेटिव पाए गए हैं। ब्लड लेने से पहले तय मानक अपनाए जाते हैं
डॉ. देवेंद्र पटेल ने बताया कि ब्लड डोनेशन के लिए तय मानकों का पालन किया जाता है। केवल उन्हीं डोनरों से ब्लड लिया जाता है, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक, वजन कम से कम 45 किलो और हीमोग्लोबिन 12 ग्राम से ऊपर होता है। ब्लड लेने से पहले प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के साथ एचआईवी सहित अन्य संक्रमणों की स्क्रीनिंग की जाती है। उन्होंने बताया कि पहले रैपिड किट से जांच होती थी, जबकि अब एलाइजा तकनीक से एंटीबॉडी डिटेक्ट की जाती है। इस जांच में 20 से 90 दिन के भीतर बनने वाली एंटीबॉडी का पता चलता है, लेकिन शुरुआती विंडो पीरियड में संक्रमण पकड़ में न आने की संभावना बनी रहती है। किट की सेंसिटिविटी भी जांच के दायरे में है। डोनर ट्रेस करने में आ रही दिक्कत
ब्लड बैंक प्रबंधन के अनुसार जांच में सबसे बड़ी परेशानी गलत मोबाइल नंबर और अधूरे पते सामने आना है, जिससे डोनरों को ट्रेस करने में दिक्कत हो रही है। अन्य मरीजों में संक्रमण की आशंका
चार बच्चों में संक्रमण सामने आने के बाद यह आशंका भी जताई जा रही है कि एचआईवी संक्रमित ब्लड अन्य मरीजों को भी चढ़ाया गया हो सकता है। ब्लड बैंक से गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को भी ब्लड दिया गया था, जिनमें से कुछ दोबारा जांच के लिए नहीं लौटे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने सीएमएचओ से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बच्ची के पिता का दावा- 6 बच्चे HIV संक्रमित
चारों बच्चों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद पीड़ित परिवार ने भी मामले को लेकर अपनी बात रखी। एक पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया कि उनकी बच्ची का जन्म 23 दिसंबर 2011 को हुआ था। 9 साल की उम्र में उसे थैलेसीमिया का पता चला। इलाज सतना और पुणे में चलता रहा। बच्ची को ब्लड ट्रांसफ्यूजन सतना जिला अस्पताल से, जबलपुर में 3 बार और सतना के बिरला अस्पताल से 2 बार किया गया। उन्होंने दावा किया कि एचआईवी पॉजिटिव बच्चे केवल चार नहीं, बल्कि छह हैं। पिता ने कहा कि प्रशासन की गलती की वजह से हमारी बच्ची को एचआईवी संक्रमण हुआ। ये भी पढ़ें… रीवा के संजय गांधी अस्पताल में आग, नवजात जला: 11 घंटे तक घटना छिपाए रहा अस्पताल प्रशासन रीवा के संजय गांधी अस्पताल के गायनी वार्ड में रविवार दोपहर करीब 1 बजे आग लग गई। आग ऑपरेशन थिएटर में लगी थी। इस घटना में एक नवजात बच्चा जल गया। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इस संवेदनशील घटना को दिनभर छिपाए रखा। परिजनों को उसका शव तक नहीं सौंपा। पढ़ें पूरी खबर…

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