प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों के आईसीयू और इमरजेंसी में लगाए गए मल्टीपेरा मॉनिटर घटिया क्वालिटी के मिले हैं। जांच में सामने आया कि मॉनिटर में लगाए गए बोर्ड उस मल्टीनेशनल कंपनी के नहीं हैं, जिनके नाम पर सप्लाई की गई थी। उनकी जगह लोकल क्वालिटी के बोर्ड लगाए गए, जो गंभीर मरीजों की सही रीडिंग देने में सक्षम नहीं हैं। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद सरकार के आदेश पर कराई गई जांच में यह गड़बड़ी सामने आई है। इसके बावजूद राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) पर दोषी अधिकारियों और सप्लायर को बचाने के आरोप लग रहे हैं। जांच रिपोर्ट आए नौ दिन हो चुके हैं, लेकिन इसे अब तक चिकित्सा सचिव और चिकित्सा मंत्री को नहीं भेजा गया है। रिपोर्ट विभाग में ही रोकी गई है। हैरानी की बात यह है कि जब जांच में गड़बड़ी प्रमाणित हो चुकी है, तब भी सप्लायर कंपनी के खिलाफ न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही रिकवरी या अन्य दंडात्मक कार्रवाई शुरू की गई है, जबकि कंपनी को लगभग पूरा भुगतान किया जा चुका है। सभी अस्पतालों की जांच क्यों नहीं?… दैनिक भास्कर ने जयपुर, अलवर, अजमेर और दौसा के अस्पतालों में लगे मल्टीपेरा मॉनिटर की जांच की थी और सभी जगह गड़बड़ी मिली थी। इसके बावजूद आरएमएससीएल ने प्रदेशभर के अस्पतालों की जांच कराने के बजाय केवल जयपुर, दौसा और अजमेर के अस्पतालों तक जांच सीमित रखी। यदि सभी अस्पतालों की जांच कराई जाती तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आ सकती थी। घटिया बोर्ड से गलत रीडिंग… मल्टीपेरा मॉनिटर आईसीयू और इमरजेंसी में गंभीर मरीजों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं। घटिया बोर्ड लगाए जाने से रीडिंग गलत आती है, जिससे मरीजों का उपचार प्रभावित हो सकता है। दैनिक भास्कर ने 7 नवंबर को ‘सांसों से खिलवाड़, आईसीयू में घटिया हार्ट बीट मॉनिटर, 40 हजार की जगह तीन हजार रुपए के बोर्ड लगाए, रीडिंग ही गलत मिल रही’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इस मामले का खुलासा किया था। हमने तीन जगह मल्टीपेरा मॉनिटर की जांच कराई है और तीनों जगह गड़बड़ी सामने आई है। अभी रिपोर्ट सरकार को नहीं दी गई है। लीगल एडवाइज के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए अनुमति ली जाएगी। – पुखराज सैन, एमडी, आरएमएससीएल


