लुधियाना में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल को किया डिजीटल अरेस्ट:खुद को बताया CBI अधिकारी, मनी लॉन्ड्रिंग केस का दिखाया डर, 35.30 लाख ठगे

पंजाब के लुधियाना में ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे है। कहीं न कहीं साइबर सेल इन अपराधियों पर नकेल डालने के भी लगातार प्रयास कर रहा है। अभी एक ताजा मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अधिकारी बताकर 81 वर्षीय रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल को डिजिटल अरेस्ट करके उनसे 35.30 लाख रुपए से अधिक की ठगी की। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग का दिखाया डर उन्होंने बताया कि आरोपियों ने सराभा नगर निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) परोपकार सिंह सिबिया को एक निजी एयरलाइन के लिए धन शोधन ( मनी लांडरिंग) का आरोप लगाकर फंसाया और उन्हें ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का डर दिखाया। बदमाशों ने उनसे अपने खाते में धन ट्रांसफर करने के लिए दबाव डाला। इसी तरह का मामला 4 महीने पहले वर्धमान समूह के प्रमुख और पद्म भूषण पुरस्कार विजेता 82 वर्षीय एसपी ओसवाल के साथ भी हुआ है। दोनों घटनाओं के पीछे एक ही मास्टर माइंड पुलिस ने बताया कि इस बार इस्तेमाल की गई कार्यप्रणाली ओसवाल मामले से काफी मिलती-जुलती है और उन्हें संदेह है कि दोनों घटनाओं के पीछे एक ही मास्टरमाइंड है। परोपकार सिंह सिबिया ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें आरोपियों की ओर से कई कॉल आए। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने खुद को CBI का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि कॉल करने वालों ने उन पर निजी एयरलाइन से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए मुंबई स्थित बैंक खाते का उपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों ने उन्हें फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजे और किसी को भी मामले का खुलासा न करने की चेतावनी दी। आरोपियों ने कर्नल को डिजिटल अरेस्ट किया शिकायतकर्ता ने कहा कि जालसाजों ने उन्हें CBI कार्यालय बताकर वीडियो कॉल करके धमकाया। सिबिया ने कहा कि उन्हें उनकी वैधता पर भरोसा था और उन्होंने आरोपियों द्वारा दिए गए बैंक खातों में कई लेन-देन में पैसे ट्रांसफर किए। सिबिया से ठगों ने कहा कि उनके लेन-देन की फोरेंसिक जांच के लिए पैसे की जरूरत है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि जालसाजों ने वादा किया था कि 72 घंटे के भीतर पैसे वापस कर दिए जाएंगे। पूरे ठगी के दौरान, आरोपियों ने उन्हें वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल निगरानी में रखा। जब उन्हें पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। साइबर क्राइम स्टेशन-हाउस ऑफिसर (एसएचओ) इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह ने बताया कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318 (4), और 61 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस बैंकों के साथ मिलकर उन खाताधारकों की पहचान करने का काम कर रही है, जिन्होंने पैसा प्राप्त किया।

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