मार्च-अप्रैल में हो सकते हैं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव:जनवरी में लॉटरी निकालने की तैयारी, वन-स्टेट-वन इलेक्शन पर संशय, जानिए- क्या है वजह

राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव जल्द हो सकते हैं। पहले पंच-सरपंच के चुनाव कराए जाएंगे। इसके बाद प्रधान और जिला परिषद के चुनाव होंगे। राजस्थान में पंच-सरपंच के चुनाव की अधिसूचना एक मार्च के आस पास जारी हो सकती है। संभावना है कि पंच-सरपंच के चुनाव 20 मार्च तक करा लिए जाएंगे। इसके एक महीने बाद यानी अप्रैल में 437 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के चुनाव कराए जा सकते हैं। पंच-सरपंच के चुनाव बैलेट पेपर यानी मत पत्र से कराए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नव गठित ग्राम पंचायतों समेत कुल 14 हजार 781 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराने के लिए राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है। अब राज्य निर्वाचन चुनाव कराने की तैयारी में जुट गया है। पंच-सरपंच और पंचायत समिति तथा जिला परिषद के चुनाव साथ-साथ कराने पर फिलहाल संशय बना हुआ है। 1 जनवरी को पुनरीक्षण, 1 फरवरी को मतदाता सूची प्रारूप प्रकाश आरक्षण को लेकर रिपोर्ट इसी महीने संभव सबसे पहले आरक्षण को लेकर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग के पास आनी है। माना जा रहा है कि 31 दिसंबर से पहले पंचायती राज विभाग आयोग को सौंप देगा। इससे यह तय होगा कि कितने वार्ड होंगे और उनकी सीमा कहां-कहां होंगी। ओबीसी आयोग आरक्षण के लिए आंकड़े उपलब्ध कराएगा। उनकी पालना जरूरी होगी। राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करेगा। ये काम होने पर आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक जनवरी में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। आरक्षण तय होने के बाद सरकार का पत्र निर्वाचन आयोग को जाएगा। फिलहाल सरपंचों को लगा रखा है प्रशासक राज्य सरकार ने प्रदेश में 11 हजार ग्राम पंचायतों में सरपंचों को प्रशासक और पूर्व सदस्यों को प्रशासनिक कमेटी की जिम्मेदारी दी गई है। हाल ही में इन सरपंचों का कार्यकाल पूरा हो गया था। ज्यादातर पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव समय पर नहीं हुए। सरकार ने मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक बनाकर कार्यकाल बढ़ा दिया था। सरपंचों और वार्ड पंचों की एक कमेटी बनाकर चुनाव होने तक उसे ही प्रशासक के पावर दे दिए। अब तक ग्राम सचिव प्रशासक लगते रहे हैं। इस बार सरकार ने नया पैटर्न अपनाया। सरपंच संघ राजस्थान के प्रवक्ता रफीक पठान का कहना है कि सरकार चुनाव करवाती है तो यह स्वागयोग्य है। हम भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द चुनाव हो। निर्वाचित सरपंचों को काम करने का अवसर मिले और रुका हुआ फंड जारी हो। राजस्थान हाई कोर्ट दे चुका है निर्देश उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव करवाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट कहा है कि 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि चुनावों में देरी न हो। 20 नवंबर को कोर्ट ने परिसीमन प्रक्रिया में दखल देने से इनकार करते हुए कहा था कि इस संबंध में आने वाली शिकायतों पर राज्य स्तरीय कमेटी ही निर्णय लेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन का अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अदालत में उसे चुनौती नहीं दी जा सकेगी। पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा राज्य में करीब 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो गया। ये पंचायत समितियां उदयपुर, टोंक, सीकर, राजसमंद समेत 21 जिलों में हैं। जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, राजसमंद, नागौर, बांसवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जालोर, झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सीकर, टोंक में जिला परिषदों में कलेक्टर को प्रशासक लगाया गया है। दावा : जनगणना और एसआईआर से काम प्रभावित नहीं ग्राम पंचायत और पंचायत समिति-जिला परिषद के चुनाव जनगणना और एसआईआर से प्रभावित होंगे? मेन पावर कहां से लाएंगे? इसके जवाब में आयोग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहां- हमारे पास मेन पावर की कमी नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार के अधिकारियों से बात हो गई है। उल्लेखनीय है राजस्थान में दो चरणों में जनगणना होगी। पहले चरण की जनगणना अप्रैल 2026 से शुरू होगी। वहीं एसआईआर की फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन 14 फरवरी को होगा। आयोग ने परिसीमन रिपोर्ट सौंपने का बनाया दबाव सूत्रों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग से जल्द से जल्द परिसीमन रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। पंचायती राज विभाग के सचिव जोगाराम को इस संबंध में आयोग ने एक पत्र भी लिखा है। जोगाराम ने आयोग के अधिकारियों से जल्द ही रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है। सूत्रों के मुताबित पंचायतीराज विभाग इस सप्ताह के अंत तक रिपोर्ट सौंप देगा। जानकारों के मुताबिक, पंचायत विभाग द्वारा परिसीमन रिपोर्ट सौंपे जाने का मतलब है कि ग्राम पंचायतों, वार्डों या अन्य स्थानीय निकायों की सीमाओं के निर्धारण या उनमें बदलाव।

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