अलाय को पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग को लेकर कल निकाली गई जन आक्रोश रैली के बाद 24 गांवों के ग्रामीण कल से धरने पर बैठे हैं। इस मामले में ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर दो दिन में हमारी मांग नहीं मानी गई तो हमें मरना पड़ा तो मरने के लिए तैयार हैं।
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि राज्य सरकार को इस मामले में अपना फैसला बदलना तो पड़ेगा अगर नहीं बदलती है तो 23 दिसंबर को मेड़ता में मुख्यमंत्री में प्रस्तावित कार्यक्रम में हम मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे।
इस मामले में जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने बताया कि इस मामले में सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है स्थानीय स्तर पर इसमें प्रशासन के हाथ में कुछ होता नहीं है। जो ज्ञापन हमें दिया गया है वो हमने सरकार को भिजवा दिया है। जिला कलक्टर ने कहा कि विरोध करना स्वाभाविक है लेकिन बजाय इसके अगर पिटीशन के माध्यम सक्षम स्तर पर अपनी बात रखें तो ज्यादा बेहतर है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी शांति व्यवस्था बनाये रखने को अपील की है।
यह है पुरा मामला यह पुरा मामला पंचायत समितियों के पूनर्गठन और और नई पंचायत समितियों के के गठन को लेकर है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा श्रीबालाजी को नई पंचायत समिति बनाया गया है। जबकि आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की मांग है कि अलाय को पंचायत समिति बनाया जाए। इस मामले को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि नई पंचायत समिति क्षेत्र के 26 में से 24 गांव अलाय को मुख्यालय बनाने के पक्ष में है और जानकारी में यह भी आ रहा है कि प्रशासन द्वारा भी अलाय को मुख्यालय बनाने का ही प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन जयपुर के आदेश पर वापस श्रीबालाजी को मुख्यालय बनाने का प्रस्ताव भेजा गया।
इस मामले को लेकर पहले ग्रामीणों ने विरोध में कई बार प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो कल जन आक्रोश रैली निकाली गई। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीण सेंकड़ों ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के साथ नागौर पहुंचे थे। रैली को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए पुलिस द्वारा बीकानेर रोड़ के फलोदी स्टैंड पर बेरीकेडिंग कि जाकर रैली को बाईपास पर डाइवर्ट करने की कोशिश की गई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गहमा गहमी भी हुई लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस के बेरीकेडिंग को धत्ता बनाकर जबरन शहर में प्रवेश कर गए।


