सलूंबर जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने जिला निगरानी समिति की इस बैठक की अध्यक्षता की। कृषि विभाग ने प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कृषि विभाग ने बताया कि जिले में 46 क्लस्टर ग्रुप के माध्यम से 5300 किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन किसानों को बायो रिसोर्स सेंटर (BRC) के जरिए प्रायोगिक तौर पर प्राकृतिक खेती करवाई जाएगी, जिससे वे भविष्य में स्वयं जैविक उत्पाद तैयार कर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। बैठक में बीआरसी के संचालन को अनुमोदन प्रदान किया गया और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक खेती सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। यह भी तय किया गया कि प्राकृतिक खेती से जुड़े सभी कार्यक्रम बीआरसी, कृषि सखी और कृषि विभाग के समन्वय से आयोजित किए जाएंगे। प्रदान सेवा संस्थान एवं सेवा मंदिर द्वारा जिले में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए किसानों को उनसे सीख लेने के निर्देश दिए गए। इस दौरान प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों जैसे बीजामृत, जीवामृत, सघन जीवामृत, अग्निस्त्र और ब्रह्मास्त्र सहित अन्य जैविक उपायों के उपयोग पर तकनीकी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संबंध में फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि योजना की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 निर्धारित है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को बीमा से जोड़ने की योजना प्रस्तुत की। जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने निर्देश दिए कि किसानों को अधिकतम संख्या में बीमा योजना से जोड़कर उन्हें सुरक्षा और लाभ सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने बैंक, नाबार्ड और एलडीएम अधिकारियों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक किसानों का बीमा लक्ष्य समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए। बैठक में कृषि विभाग, उद्यान विभाग, सहकारिता विभाग, नाबार्ड, बैंक, फसल बीमा कंपनी, प्रदान और सेवा मंदिर के अधिकारी तथा किसान जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


