मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी क्षेत्र में पश्चिम रेलवे के दोहरीकरण कार्य से जल-निकासी और आवागमन संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए ग्राम बरखेड़ापंथ, पिपलिया मंडी और आसपास के ग्रामीणों तथा सामाजिक संगठनों ने पश्चिम रेलवे, मुंबई के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि तहसील मल्हारगढ़ के ग्राम बरखेड़ापंथ स्थित रेलवे फाटक क्रमांक 139 के पास से कृषि भूमि तक पहुंचने वाला लगभग 100 वर्ष पुराना मार्ग रेलवे भूमि से होकर गुजरता है। यह मार्ग आसपास के खेतों और गांवों के पानी की प्राकृतिक निकासी का भी जरिया रहा है। पिछले कुछ वर्षों से चल रहे रेलवे दोहरीकरण कार्य के कारण यह प्राकृतिक जल-निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है। निर्माण के दौरान बनाई गई पुलिया का आधार (बेस) जमीन से ऊंचा होने के कारण पानी का बहाव रुक गया है। इससे सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि में पानी भर जाता है, जिससे किसानों की फसलें लगातार खराब हो रही हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थायी समाधान के लिए अंडरब्रिज की मांग
किसानों ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक बड़ी नाली का निर्माण कर समुचित जल-निकासी व्यवस्था करने तथा कृषि मार्गों को पुनः सुचारु करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, रेलवे फाटक क्रमांक 139 के लंबे समय तक बंद रहने की समस्या भी प्रमुखता से उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि यह एक लॉक फाटक है, जिससे 5 से 7 गांवों का आवागमन जुड़ा हुआ है। गांव की लगभग 75 प्रतिशत कृषि भूमि इस फाटक के उस पार स्थित है, जहां अफीम जैसी कीमती फसलों की खेती होती है। ट्रेनों की लगातार आवाजाही के कारण यह फाटक कई बार एक से दो घंटे तक बंद रहता है, जिससे किसानों, विद्यार्थियों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन से फाटक को अनलॉक करने अथवा स्थायी समाधान के रूप में अंडरब्रिज (अंडरपास) के निर्माण की मांग की है। वहीं महेश्वरी समाज सेवा समिति, पिपलिया मंडी ने भी रेलवे महाप्रबंधक को पत्र लिखकर स्टेशन परिसर की जल-निकासी समस्या से अवगत कराया है। समिति के अनुसार प्लेटफॉर्म नंबर 2 के समीप नई दीवार निर्माण के बाद पानी जमा हो रहा है, जिससे रेलवे संपत्ति के साथ-साथ समाज भवन को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। समिति द्वारा पूर्व में ई-मेल के माध्यम से शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। ग्रामीणों और समाजजनों ने उम्मीद जताई है कि रेलवे प्रशासन इन समस्याओं की गंभीरता को समझते हुए मौके पर निरीक्षण करेगा और शीघ्र स्थायी समाधान सुनिश्चित करेगा, ताकि कृषि, यातायात और जनहित को होने वाला नुकसान रोका जा सके।


