जिठाना में शिक्षकों की कमी पर स्कूल पर ताला:ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, दो नए शिक्षकों की नियुक्ति के बाद खुला

झालावाड़ के खानपुर स्थित जिठाना गांव के गवर्नमेंट हायर प्राइमरी स्कूल में शिक्षकों की गंभीर कमी को लेकर ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह विरोध प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता अरविंद नागर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। यह कार्रवाई लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान न होने के कारण की गई। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक माह से स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी थी। शिक्षकों की कमी के कारण कक्षाएं नियमित रूप से नहीं लग पा रही थीं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। बच्चों का पाठ्यक्रम और परीक्षा की तैयारी बाधित हो रही थी, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इस संबंध में प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इससे ग्रामीणों में रोष बढ़ता गया और उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया। घटना की सूचना मिलते ही मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) सियाराम नागर मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल की स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। रिकॉर्ड की जांच के बाद सीबीईओ ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए त्वरित कार्रवाई की। सीबीईओ सियाराम नागर ने स्कूल में दो नए शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति के आदेश जारी किए। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार का व्यवधान स्वीकार्य नहीं है और स्कूल में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां शीघ्र शुरू कराई जाएंगी। उन्होंने भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की बात भी कही। प्रशासनिक आश्वासन और नियुक्ति आदेशों के बाद ग्रामीणों ने संतोष व्यक्त किया और स्कूल का ताला खोल दिया। अभिभावकों और ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब स्कूल में नियमित पढ़ाई बहाल होगी और विद्यार्थियों को हुए शैक्षणिक नुकसान की भरपाई हो सकेगी। इस अवसर पर पीईईओ लक्ष्मीनारायण सोनी, पीटीआई दयाकृष्ण शर्मा, स्कूल विकास समिति के अध्यक्ष राकेश नागर सहित शुभम वैष्णव, रामावतार, धर्मराज, सुमित, रमेश वैष्णव, दामोदर मेहरा, मोहनलाल और अन्य ग्रामीण मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर नियुक्तियां और प्रभावी निगरानी व्यवस्था ही बच्चों की शिक्षा को सुरक्षित कर सकती है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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