शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की सदस्य किरणजोत ने पंजाब सरकार पर सिख मर्यादा से छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हुए किरणजोत ने कहा कि पंजाब सरकार सिखों का ब्राह्मणी करण कर रही है, जो सिख धर्म की मूल भावना और परंपराओं के खिलाफ है। किरणजोत ने कहा कि सिख धर्म में तंबाकू हलाल मीट बज्जर कुरीत माने गए हैं। इसके साथ ही शराब और अन्य नशों पर भी सिखी में सख्त पाबंदी है। लेकिन इसके बावजूद झटका मीट को लेकर सिखों के अधिकारों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झटका मीट सिखों का धार्मिक, ऐतिहासिक और संवैधानिक अधिकार है, जिसे कोई भी सरकार छीन नहीं सकती। SGPC सदस्य ने सिख इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अकाली दल ने वर्ष 1935 में झटका कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस मुद्दे को मजबूती से उठाया था। उन्होंने बताया कि गुरु साहिबान और सिखों के शिकार खेलने से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं। किरणजोत ने गुरु नानक देव जी की उस साखी का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण के समय हिरण का मांस पकाया था। किरणजोत ने SGPC प्रधान से मांग की कि वे इस मुद्दे पर पंजाब सरकार के सामने सख्त एतराज दर्ज कराएं और सिखों की मर्यादा व अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सिख समाज डेरावाद की मर्यादा छोड़कर सिंहों की असली मर्यादा की ओर लौटे। उन्होंने साफ कहा कि सिख पहचान, परंपरा और धार्मिक अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और इस लड़ाई को हर स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।


