कलीम उर्फ कल्लू को खतरे पर मिलेगी पुलिस सुरक्षा:हाईकोर्ट के खंडवा एसपी को निर्देश; चौकी प्रभारी पर जान से मारने के आरोप लगाए थे

खंडवा के बोरगांव बुजुर्ग निवासी कलीम उर्फ कल्लू द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के मामले में अब पुलिस को जवाबदेह होना होगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि यदि कलीम को किसी भी प्रकार का खतरा महसूस होता है तो उसे पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और उसकी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए। यह आदेश 12 दिसंबर 2025 को पारित किया गया। याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जब भी सुरक्षा की जरूरत महसूस करे, सीधे पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकता है। जांच के आधार पर यदि सुरक्षा जरूरी पाई जाती है, तो कानून के दायरे में तत्काल व्यवस्था की जाए। हाईकोर्ट ने खंडवा पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि, शिकायतों पर तीन माह के भीतर कानूनन कार्रवाई की जाए। अब जान लिजिए, क्या है पूरा मामला
कलीम खान उर्फ कल्लू ने बोरगांव पुलिस चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव पर जान से मरवाने की धमकी सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे। कलीम ने 24 अक्टूबर 2025 को पंधाना थाना और पुलिस अधीक्षक को शपथ पत्र देकर शिकायत की थी। इसके बाद 1 दिसंबर को कलेक्टर को भी शिकायत सौंपी गई, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई न होने से नाराज होकर कलीम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस प्रशासन को मामले में सक्रिय होना पड़ेगा। धारा 151 में जेल भेजने का आरोप
कलीम का आरोप है कि पुलिस चौकी प्रभारी ने उस पर गलत तरीके से धारा 151 लगाकर उसे पांच दिन के लिए जेल भेज दिया, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इस मामले में भी जांच के आदेश दिए गए हैं और चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव के खिलाफ उचित कार्रवाई के निर्देश हैं। फोन पर ‘निपटा देने’ की बात का आरोप
गांव के सरपंच रामचंद्र सोने उर्फ गोटिया ने शपथ पत्र में आरोप लगाया कि 17 जुलाई 2025 की रात करीब 10.21 बजे उसे एक कॉल आया, जिसमें चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव ने कथित तौर पर कहा कि “कलीम उर्फ कल्लू को निपटा दे।” गोटिया का कहना है कि उसने इस बात से साफ इनकार कर दिया और अगले दिन पूरी जानकारी कलीम को दी। इसके बाद एसपी और कलेक्टर को शपथ पत्र सहित शिकायत की गई। जुआ कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत 8 फरवरी 2025 को हुई, जब बोरगांव पुलिस को खिराला गांव में जुए की सूचना मिली। पुलिस ने मौके से चार लोगों को पकड़ा, जिनमें कलीम उर्फ कल्लू भी शामिल था। पुलिस का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कलीम ने चौकी प्रभारी और गवाहों को धमकियां दीं। इसके बाद धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई और कलीम को जेल भेजा गया। इसी घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ, जो अब हाईकोर्ट तक पहुंचा। अब आगे क्या होगा
हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका क्रमांक 2025 एमपीएचसी-जेईपी:1369 का निपटारा हो चुका है। अब कलीम को सुरक्षा या जांच से जुड़े किसी भी मामले में सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय से संपर्क करना होगा। पुलिस अधीक्षक जांच के आधार पर फैसला लेंगे और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। हाईकोर्ट के इस आदेश से यह संदेश गया है कि शिकायत चाहे किसी भी पुलिस अधिकारी के खिलाफ क्यों न हो, उसकी सुनवाई और समयबद्ध जांच जरूरी है।

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