शिप्रा नदी के घाट कितने सुरक्षित हैं, यह रामघाट पर देख सकते हैं। नदी में उतरते ही न तो उन्हें पानी की गहराई का अंदाजा लगता और न ही सेफ्टी के लिए कोई चेन है, यहां सुरक्षा के लिए रस्सी तक नहीं बांधी है। श्रद्धालु गहराई में जाकर डूबने लगते हैं। पिछले दो साल में कुल 615 लोगों को यहां डूबने से बचाया है। साढ़े तीन साल पहले अधूरी तैयारी के चलते नदी के घाटों के कायाकल्प करने और सुरक्षा व्यवस्था आदि के लिए 13.30 करोड़ रुपए का प्लान मंजूर कर टेंडर जारी कर दिया, लेकिन काम ही शुरू नहीं हो पाया। अब नगर निगम की ओर से शिप्रा के घाटों का जीर्णोद्धार करने के लिए 100 करोड़ रुपए से अधिक की डीपीआर बनाकर इसे स्वीकृति के लिए भोपाल भेजी है। स्वीकृति मिलने के बाद इसके टेंडर जारी कर काम शुरू किया जाएगा। 2024 में 370 और 2025 में 245 लोग नदी में डूबने से बचे रामघाट पर दो वर्षों के भीतर करीब 615 लोगों को होमगार्ड के जवानों ने नदी में डूबने से बचाया है। वर्ष 2024 में कुल 370 लोगों को रामघाट पर डूबने से बचाया था। वहीं 2025 में अब तक 245 लोगों को बचाया है।घाटों पर सेफ्टी चेन और समानांतर प्लेटफॉर्म नहीं होने से श्रद्धालु गहराई में जाकर डूबने लगते हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए होमगार्ड के जवानों को तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगाई जाती है। घाटों पर चेंजिंग रूम नहीं है। इसके कारण विशेष रूप से महिलाओं को परेशानी होती है। अधूरी तैयारी से बना प्लान, जल्दबाजी में वर्कऑर्डर भी जारी कर दिया श्रद्धालुओं के डूबने की कई घटनाएं सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी की ओर से जून 2022 में 13.30 करोड़ रुपए से घाटों के कायाकल्प व सुरक्षा सहित अन्य कामों का प्लान तैयार किया था। तत्कालीन निगमायुक्त अंशुल गुप्ता ने प्लान मंजूर करवाया। ग्वालियर की सुदर्शन इंजीनियरिंग वर्क एजेंसी का टेंडर स्वीकार करते हुए वर्कऑर्डर जारी कर दिया। आर्किटेक्ट और इंजीनियरों की टीम ने घाटों का सर्वे किया, लेकिन अधूरी तैयारी के साथ टेंडर जारी होने के बाद भी कोई काम नहीं हो सका। आखिरकार टेंडर निरस्त किया। शासन स्तर पर इसे इसलिए खारिज किया, क्योंकि यह काम केवल कुछ चुनिंदा घाटों के लिए ही तैयार किया था। 113.89 करोड़ रुपए की डीपीआर, स्वीकृति बाकी अब सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते डीपीआर तैयार की है। शिप्रा पर नए घाटों का निर्माण जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) द्वारा किया जाएगा। वहीं पुराने घाटों का जीर्णोद्धार नगर निगम द्वारा किए जाएंगे। इसके लिए कुल 113.89 करोड़ की डीपीआर बनाई है।105 करोड़ से स्थायी निर्माण होगा। वहीं 8.99 करोड़ से अस्थायी निर्माण के चलते जीर्णोद्धार, सेफ्टी चेन, रेलिंग, पेंटिंग सहित अन्य काम होंगे। डीपीआर को तकनीकी स्वीकृति के लिए नगरीय प्रशासन विभाग को राज्य स्तरीय समिति को भेजा है। अभी स्वीकृति बाकी है। घाटों पर सुरक्षा के ऐसे हालात, संकेतक नहीं घाटों पर समानांतर प्लेटफॉर्म नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को गहराई का अंदाजा नहीं लगता। नदी में उतरते ही एक सीढ़ी नीचे जाने पर डेढ़ से दो फीट, दूसरी सीढ़ी उतरने पर तीन से चार फीट और तीसरी-चौथी सीढ़ी उतरते ही अचानक 8 से 10 फीट गहराई हो जाती है। इसमें प्रवेश करते ही लोग डूबने लगते हैं। पानी की गहराई को लेकर स्पष्ट कोई संकेतक नहीं है। प्रमुख धार्मिक स्थलों पर नदी में श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान सुरक्षा के लिए सेफ्टी लगाई जाती है। पहले जो टेंडर जारी किया था, उसे निरस्त किया पहले घाटों के रिनोवेशन को लेकर जो टेंडर जारी किया था, उसे शासन के आदेश पर निरस्त कर दिया था। अब डीपीआर कर नगर निगम काम करेगा।— संदीप शिवा, सीईओ, स्मार्ट सिटी डीपीआर को स्वीकृति के लिए भेजा है घाटों के जीर्णोद्धार को लेकर डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए भोपाल भेजी है। स्वीकृति के बाद टेंडर जारी कर काम शुरू करवाया जाएगा।— अभिलाष मिश्रा, निगमायुक्त


