ग्वालियर में आयोजित 101वें तानसेन समारोह में पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र और देवब्रत मिश्र ने अपने सितार वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने संगीत से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की और ग्वालियर की जमकर तारीफ की। 40 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके देवब्रत मिश्र ने ग्वालियर के संगीत प्रेमियों की सराहना करते हुए कहा कि कलाकार तो अपनी परंपरा निभाते ही हैं, लेकिन ग्वालियर का श्रोता भी अपनी परंपरा निभा रहा है, यह बड़ी बात है। देश के प्रमुख सितार वादकों में से एक पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र को उनकी साधना के लिए भारत सरकार द्वारा 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में आयोजित तानसेन समारोह में आमंत्रित किया जाना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने पहली बार ग्वालियर आने को गौरवपूर्ण बताया, क्योंकि यह तानसेन की नगरी है। पंडित मिश्र ने बताया कि उनकी तीनों पीढ़ियां सितार वादन करती हैं और वे इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह देखकर खुशी जताई कि यहां लोग वास्तव में संगीत सुनने आते हैं। उन्होंने ग्वालियर में गुरु-शिष्य संगीत परंपरा के जारी रहने और इसे साकार करने के लिए विश्वविद्यालयों की मौजूदगी की भी सराहना की। उनके अनुसार, गुरु-शिष्य परंपरा से संगीत सीखने वाला जीवन में बहुत आगे जाएगा। शास्त्रीय संगीत की लोकप्रियता पर फिल्मों के प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा कि अब पहले जैसे निर्देशक और निर्माता नहीं रहे, जो संगीत को प्राथमिकता पर रखकर फिल्में बनाते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी भी काम हो रहा है, लेकिन शास्त्रीय संगीत पर थोड़ा कम ध्यान दिया जा रहा है। यही कारण है कि पहले के गाने आज भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।


