जु​िबली वर्ष ; ख्रीस्तीय आशा न धोखा देती, न निराश करती है, यह निश्चितता पर टिकी है : पोप फ्रांसिस

सिटी रिपोर्टर | रांची कैथोलिक कलीसिया साल 2025 को जुबिली वर्ष के रूप में मना रही है। 29 दिसंबर को रांची के महागिरजाघर में जुबली वर्ष का विधिवत उ‌द्घाटन हुआ। इसी दिन जुबली क्रूस की भी आशीष हुई। आर्चबिशप विंसेंट आइंद ने बताया कि यह क्रूस आशा का प्रतीक है। यह जुबिली क्रूस अभी रांची महागिरजा के अंतर्गत गांवों और टोलों में भ्रमण कर रहा है। इसके बाद अन्य पल्ली में भी भ्रमण करेगा। इस दौरान पल्ली पुरोहित और सहायक पुरोहित संत पापा फ्रांसिस द्वारा दिए गए धर्मपत्र स्पेस नन कोनफुन्दित का हिंदी अनुवाद पढ़कर सुनाएंगे। उन्होंने सभी डीन और पल्ली पुरोहितों से पवित्र वर्ष का आत्मिक लाभ विश्वासियों को देने की बात कही है। जुबिली वर्ष-2025 के लिए संत पिता फ्रांसिस के अधिकारिक पत्र (पेपल बुल) में निहित संदेश : “आशा निराश नहीं करती (रोम. 5:5)। आशा की इस भावना के साथ संत पौलुस ने इन शब्दों से रोम के ख्रीस्तीय समुदाय को संबोधित किया। मेरा ध्यान उन आशा के तीर्थ यात्रियों की ओर जाता है जो पवित्र वर्ष का अनुभव करने के लिए रोम की यात्रा करेंगे। मेरा ध्यान उन सबकी ओर भी जाता है, जो संत पेत्रुस और पौलुस प्रेरितों की नगरी का दर्शन नहीं कर पाएंगे, पर अपने स्थानीय कलीसिया में जुबिली का उत्सव मनाएंगे। प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह जुबली की अवधि प्रभु येसु से वास्तविक एवं व्यक्तिगत रूप से मिलन की घड़ी हो, जिसे सदैव, सब जगह और सब राष्ट्रों को “हमारी आशा’ के संबंध में घोषित करने का आदेश कलीसिया को दिया गया है। यह जुबिली आशा में दृढ़ता-प्राप्ति का सुंदर अवसर है। आशा का जन्म प्रेम से हुआ है। ख्रीस्तीय आशा न धोखा देती न निराश करती है, क्योंकि यह निश्चितता पर टिकी हुई है कि कोई भी हमें ईश्वर के प्रेम से कभी वंचित नहीं कर सकता है। हमें हमारी दुनिया में विद्यमान अच्छाइयों को पहचानना है। हमारे जीवन जीने के तरीके को उनसे इतने शब्दों में कहेंः “प्रभु में आशा बनाए रखो। स्थिर रहो, भरोसा रखो और प्रभु में आशा बनाए रखो’। संत पिता फ्रांसिस

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