भास्कर न्यूज | लुधियाना मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर श्री अयप्पा मंदिर, लुधियाना, 14 जनवरी 2025 को एक भव्य आयोजन करने जा रहा है। यह उत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेंगे। इस दिन का मुख्य आकर्षण शोभायात्रा और केरल की पारंपरिक थालप्पोली रस्म होगी, जिसमें 101 महिलाएं और लड़कियां थालम (प्लेट) में चावल, फूल और जलते दीपक के साथ परंपरा निभाएंगी। यह रस्म समृद्धि और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। फोकल पॉइंट स्थित मंदिर में होने वाले इस आयोजन में केरल के कलाकार पारंपरिक नृत्य और नाटक प्रस्तुत करेंगे। शोभा यात्रा में रंग-बिरंगे परिधानों और सांस्कृतिक झांकियों के साथ यह समारोह धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत करेगा। थालप्पोली रस्म में शामिल महिलाएं दीपक लेकर चलेंगी, जो उजाले और समृद्धि का प्रतीक है। इस मौके पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा। शोभा यात्रा के दौरान केरल की परंपराओं के साथ आधुनिक सांस्कृतिक झलकियां भी देखने को मिलेंगी। इस आयोजन का उद्देश्य धर्म और संस्कृति के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे इस उत्सव में भाग लेकर इसे सफल बनाएं। आयोजन में हर आयु वर्ग के लोगों के लिए कुछ खास देखने और अनुभव करने को मिलेगा। इस दिन का महत्व बताते हुए मंदिर समिति ने कहा कि मकर संक्रांति न केवल सूर्य की उपासना का पर्व है, बल्कि यह उत्सव भाईचारे और सांस्कृतिक विविधता का भी संदेश देता है। {मंदिर खुलने का समय: 06:00 बजे: मकर संक्रांति के इस खास दिन की शुरुआत मंदिर के दर्शन से होगी। भक्तगण सुबह-सुबह मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे। {महा गणपति होमम: 06:30 बजे: इस विशेष दिन की शुरुआत महा गणपति होमम से की जाएगी, जिसमें गणपति भगवान से समृद्धि और सुख-शांति की कामना की जाएगी। {मकर संक्रांति अभिषेक: 08:55 बजे: मकर संक्रांति के विशेष अवसर पर भगवान अयप्पा का अभिषेक किया जाएगा, जिससे भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त होगा और पुण्य के कार्य में भाग लेने का अवसर मिलेगा। {शोभा यात्रा: 04:30 बजे: शाम 4:30 बजे से फोकल प्वाइंट में शोभा यात्रा का आयोजन होगा। इस यात्रा में पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों भक्त शामिल होंगे, जो जाति, पंथ और धर्म से ऊपर उठकर एकता का संदेश देंगे। यात्रा के दौरान भक्त भगवान अयप्पा के जयकारे लगाएंगे और मार्ग में स्थित विभिन्न स्थानों पर पूजा अर्चना की जाएगी। {दीपार्जन (आरती): 07:00 बजे: इस दिन की समाप्ति दीपार्जन (आरती) से होगी, जिसमें भगवान अयप्पा को दीपों से अर्पित किया जाएगा। यह एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक क्षण होगा, जो सभी भक्तों को आत्मिक शांति प्रदान करेगा। {अन्नदानम (लंगर): 08:30 बजे: पवित्र दिन की समाप्ति अन्नदानम (लंगर) से होगी। यह कार्यक्रम सभी भक्तों के लिए भोजन वितरण का आयोजन है, जिसमें कोई भी भक्त मुफ्त में भोजन प्राप्त कर सकता है। यह कार्य भगवान की कृपा और सेवा का प्रतीक है। प्रमुख आयोजन और समय श्रद्धालुओं का उत्साह और विश्वास अद्भुत थालप्पोली रस्म की उत्पत्ति केरल में हुई थी और इसे समृद्धि, उन्नति और सुख-शांति के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और अब श्री अयप्पा मंदिर में इसका आयोजन हर श्रद्धालु को एक साथ जोड़ने का माध्यम बन चुका है। यहां श्री अयप्पा मंदिर में हर मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं का उत्साह और विश्वास अद्भुत होता है। इस दिन मंदिर की सांस्कृतिक धारा से जुड़े हर भक्त का दिल श्रद्धा और आनंद से भरा रहता है। जब थालप्पोली रस्म के दौरान महिलाएं अपने हाथों में जलते दीपक और चावल की थालियां लेकर चलती हैं, तो यह दृश्य न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान होता है, बल्कि एक आत्मिक यात्रा का अहसास भी कराता है।


