करमाटांड़ आईटीआई कॉलेज अपने उद्देश्यों पर सफल होता नहीं दिख रहा है। यहां के छात्र-छात्राओं को तकनीकी शिक्षा देने के लिए वर्ष 2016 में 4.5 करोड़ रुपए की लागत से कॉलेज की स्थापना की गई थी। यहां 8 ट्रेड संचालन की सुविधा है, लेकिन शिक्षकों की कमी से 6 ट्रेडों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। कॉलेज में वर्तमान में 160 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, वर्तमान में इस कॉलेज में केवल 3 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि विभिन्न ट्रेडों में कुल 23 शिक्षकों की आवश्यकता है। यहां तक की प्रभारी प्राचार्य को भी कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। कॉलेज में वर्तमान में फिटर और इलेक्ट्रीशियन के लिए चार-चार शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि इन दोनों विभागों में सिर्फ एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं। इसी तरह, डीजल मैकेनिक, वेल्डर, गणित और चित्रकला के लिए कुल 6 शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन इन सभी विषयों में एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है। इंजीनियरिंग ट्रेनिंग के लिए भी दो शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन यहां भी एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है। इसके अलावा, प्रधान लिपि के लिए एक, उच्च वर्ग , लिपिक के लिए दो और निम्न वर्ग लिपिक के लिए तीन कर्मचारी की जरूरत है, लेकिन इन सभी विभागों में भी कोई नियुक्ति नहीं की गई है। इसके अलावा, कॉलेज में छात्राओं के लिए छात्रावास की कोई व्यवस्था नहीं है, जो एक और बड़ी समस्या बन गई है। कॉलेज में छात्रावास की सुविधा न होने की वजह से पलामू, मिहिजाम, पाकुड़ और अन्य जिलों से आने वाली छात्राओं की उपस्थिति कम हो रही है। छात्राएं अपने अध्ययन के लिए करमाटांड़ बाजार में किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। एक छात्रा अल्का लकड़ा, जो पलामू जिले की रहने वाली है उसने बताया कि वह प्रतिदिन सीताकाटा पंचायत भवन के पीछे किराए के मकान से कॉलेज पढ़ने आती है। कॉलेज में छात्रावास की व्यवस्था नहीं होने की वजह से उसे यह कठिनाई झेलनी पड़ रही है। अल्का जैसी अन्य छात्राएं भी समस्याओं का सामना कर रही हैं और अगर कॉलेज में छात्रावास की व्यवस्था होती तो उनकी संख्या में भी वृद्धि होती। विद्यार्थियों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने इस मुद्दे को लेकर कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन अब तक इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया है। छात्रों और छात्राओं का कहना है कि अगर शिक्षकों की नियुक्ति और छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, तो यहां की शिक्षा प्रणाली में सुधार होगा और अधिक छात्रों का भविष्य उज्जवल होगा। इस समस्या को दूर करने के लिए कॉलेज प्रशासन को जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाने चाहिए। प्रशिक्षकों की नियुक्ति से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। छात्रावास नहीं, किराए के मकान में रहती हैं दूसरे जिले की छात्राएं


