राजस्थान शिक्षक संघ का दो दिवसीय समारोह:शिक्षा मंत्री मदन दिलावर हुए शामिल, 10 हजार टीचर हुए शामिल

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय का प्रदेश शैक्षिक समारोह बांसवाड़ा के डांगपाड़ा स्थित लिओ इंटरनेशनल संस्थान में आयोजित हुआ। शुक्रवार को उद्घाटन सत्र में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर मुख्य अतिथि रहे। इस अवसर पर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी ने आशीर्वचन दिए, जबकि अखिल भारतीय शैक्षणिक महासंघ के संगठन मंत्री महेंद्र कपूर मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा ने की। 41 जिलों के प्रत्येक 402 ब्लॉक के सदस्य जुटे संगठन के महामंत्री महेंद्र लखारा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षक संघ राजस्थान का सबसे बड़ा संगठन है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य स्तरीय शिक्षा के इस महाकुंभ समारोह में संगठन के 41 जिलों के प्रत्येक 402 ब्लॉक के सदस्यों ने भाग लिया। राजस्थान में इस संगठन के 2 लाख 75 हजार शिक्षक सदस्य हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षक संघ राष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा संगठन होने के साथ-साथ शिक्षकों की समस्याओं के समाधान और अनेक सामाजिक कार्यों का आयोजन भी करवाता है। समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सभी शिक्षकों को कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने के लिए प्रेरित किया। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के अजमेर जिला कार्यकारी सदस्य और सावर उप शाखा के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष लादू लाल मीणा ने बताया कि सावर ब्लॉक से 75 शिक्षकों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। वर्तमान अध्यक्ष प्रहलाद कुमावत और मंत्री मदन लाल मीणा ने बताया कि बांसवाड़ा के शिक्षक सम्मेलन में सावर क्षेत्र से अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नेमीचंद खटीक, प्रधानाचार्य आनंदीलाल मीणा, खेमराज मीणा, सज्जन सिंह, राजस्थान शिक्षक संघ केकड़ी अध्यक्ष मोजेंद्र राव और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य महेश शर्मा भी शामिल हुए। इस समारोह में कुल लगभग 10,000 शिक्षकों ने भाग लिया। प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा ने शिक्षा मंत्री के समक्ष सभी प्रकार की पदोन्नति, पंचायत शिक्षकों को नियमित करने और सभी तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादला के संबंध में अपनी बात रखी। बता दे कि राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय संगठन की मांग पर पूरे राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 19 और 20 दिसंबर को छुट्‌टी रखा गया था, ताकि सम्मेलन में भाग लेने वाले शिक्षकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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