उदयपुर में अरावली पर्वतमाला बचाने का संघर्ष शुरू:जिला कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन, फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठी

अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर उदयपुर में संघर्ष की शुरुआत हो गई है। जिला कलेक्ट्रेट के बाहर शुक्रवार को अरावली बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अरावली पर्वतमाला से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर सवाल खड़े करते हुए उसे तथ्यों से परे बताया। वक्ताओं ने कहा कि अरावली को केवल 100 मीटर की सामान्य पहाड़ी मानना पूरी तरह गलत और भ्रामक है। अरावली एक विस्तृत पर्वत श्रृंखला है, जो पर्यावरण, जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि अरावली के अस्तित्व के साथ इस तरह की छेड़छाड़ जारी रही, तो इसका गंभीर खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। समिति ने सरकार से अरावली पर्वतमाला को लेकर स्पष्ट और ठोस नीति बनाने की मांग की। इस प्रदर्शन में मेवाड़ महामंडलेश्वर रास बिहारी शास्त्री, मावली के पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, भाजपा के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष रविंद्र श्रीमाली सहित कई सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में कहा कि अरावली बचाने के लिए यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। उधर, शहर जिला कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस पर्यावरण प्रकोष्ठ के तत्वाधान में भी प्रदर्शन हुआ। युवाओं और महिलाओं ने सेव अरावली के पोस्टर-बैनर हाथों में लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करता, तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। अरावली को केवल 100 मीटर की पहाड़ी मानने को पर्यावरण और मेवाड़ की अस्मिता के साथ अन्याय बताया गया। इस प्रदर्शन में शहर जिलाध्यक्ष फतह सिंह राठौड़, दिनेश श्रीमाली, वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राजोरा, सत्यनारायण टांक, ब्लॉक अध्यक्ष अजय सिंह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे।

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