भाविश अग्रवाल ने ओला इलेक्ट्रिक के ₹324 करोड़ शेयर बेचे:लगातार तीन दिन में अपनी 2.2% हिस्सेदारी बेची; कंपनी का 240 करोड़ का लोन चुकाया

ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के फाउंडर और प्रमोटर भाविश अग्रवाल ने 18 दिसंबर को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर बेचे। तीन दिनों में वे करीब 2.2% हिस्सेदारी बेच चुके हैं, जिसकी कुल वैल्यू 324 करोड़ रुपए से ज्यादा है। एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, भाविश अग्रवाल ने गुरुवार को ओला इलेक्ट्रिक के 2.83 करोड़ इक्विटी शेयर (कुल पेड-अप कैपिटल का 0.64%) 31.9 रुपए प्रति शेयर की औसत कीमत पर बेचे। वहीं इस सौदे से उन्हें करीब 90.3 करोड़ रुपए मिले। इससे पहले बुधवार को 142.3 करोड़ और मंगलवार को 91.87 करोड़ रुपए के शेयर बेचे गए थे। इस रकम से भाविश ने कंपनी का 240 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाया है। लोन खत्म करने के लिए बेची हिस्सेदारी भाविश अग्रवाल ने 16 दिसंबर को एक्सचेंज को जानकारी दी थी कि उन्होंने प्रमोटर-लेवल लोन चुकाने के लिए अपनी निजी हिस्सेदारी का एक छोटा हिस्सा एकमुश्त बेचा है। यह लोन राशि करीब 260 करोड़ रुपए थी। लेकिन तीन दिनों में ₹324 करोड़ की सेलिंग हुई, जो लोन से ज्यादा है। कंपनी का कहना था कि यह वन-टाइम लिमिटेड मोनेटाइजेशन है ताकि प्रमोटर प्लेज खत्म हो। प्लेज से रिस्क और वॉलेटिलिटी आती है। भाविश का कहना है कि कंपनी जीरो प्लेज के साथ चलना चाहिए। लोन चुकाने के बाद 10% चढ़ा शेयर शुक्रवार, 19 दिसंबर को शुरुआती कारोबार में ओला इलेक्ट्रिक का शेयर करीब 10% उछलकर 34.40 रुपए पर बंद हुआ। यह तेजी तब आई, जब कंपनी ने एक्सचेंज को बताया कि फाउंडर भाविश अग्रवाल ने अपनी निजी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर लगभग 260 करोड़ रुपए का प्रमोटर-लेवल लोन पूरी तरह चुका दिया है। कंपनी के अनुसार, इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद प्रमोटर की ओर से गिरवी रखे गए सभी 3.93% शेयर रिलीज हो गए हैं और अब ओला इलेक्ट्रिक में प्रमोटर प्लेज शून्य हो गया है। बाजार में इसे एक बड़ा पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है, क्योंकि प्रमोटर प्लेज को निवेशक जोखिम और अस्थिरता से जोड़कर देखते हैं। बिक्री से लगातार दबाव में था शेयर प्रमोटर की लगातार बिक्री के चलते ओला इलेक्ट्रिक का शेयर दबाव में रहा और 18 दिसंबर को 5% गिरकर 31.26 रुपए के ऑल-टाइम क्लोजिंग लो पर बंद हुआ था। शेयर अपने रिकॉर्ड हाई 157.4 रुपए (20 अगस्त) से करीब 80% टूट चुका था। गिरावट के बाद कंपनी का मार्केट कैप घटकर 13,797 करोड़ रुपए रह गया, जबकि उच्चतम स्तर पर यह करीब 69,000 करोड़ रुपए था।

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