प्रयागराज महाकुंभ की तैयारी:महाकुंभ के लिए 12 जनवरी से चलेंगी ब्लू लाइन और नॉन एसी रोडवेज बसें भरतपुर से सुबह 9 बजे रवाना होगी

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने प्रयागराज में आयोजित होने वाले ‘महाकुंभ के लिए विशेष बस सेवा शुरू की है। यह सेवा 12 जनवरी से शुरू होगी। जयपुर से संचालित यह बस भरतपुर, आगरा और कानपुर होते हुए प्रयागराज तक जाएगी। इस रूट की कुल दूरी 750 किलोमीटर होगी। बस अलग-अलग समय पर जयपुर से प्रयागराज और प्रयागराज से चलेगी। बता दें कि प्रयागराज उत्तरप्रदेश में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक महाकुंभ का आयोजन होगा। इस आयोजन में करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना है। मुख्य प्रबंधक शक्ति सिंह ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए दो श्रेणियों की बसें चलाई जाएंगी। ब्लू लाइन एक्सप्रेस बस सुबह 5:00 बजे जयपुर से प्रस्थान करेगी और भरतपुर सुबह 9 बजे भरतपुर पहुंचेगी। यहां से रवाना होकर रात 8:00 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। इसी प्रकार, यह बस सुबह 9:00 बजे प्रयागराज से रवाना होकर रात 12:00 बजे जयपुर पहुंचेगी। नॉन एसी स्लीपर बस सेवा एक्सप्रेस-वे से होकर जाएगी। यह बस शाम 3:30 बजे जयपुर से प्रस्थान करेगी और रात 7.30 बजे भरतपुर पहुंचेगी। यहां से चलकर बस अगले दिन सुबह 6:30 बजे प्रयागराज पहुंचेगी, जबकि प्रयागराज से यह शाम 6:00 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 9:00 बजे जयपुर पहुंचेगी। कुंभ के लिए आरएसएस ने 11 हजार थालियां और कपड़े के थैले भेजे प्रयागराज महाकुंभ को हरित कुंभ बनाने के लिए राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक थाली-एक थैली अभियान चला रहा है। प्रदेश भर से करीब पांच लाख थाली और कपड़े के थैले भेजे जा रहे हैं। इसमें भरतपुर जिले से 11 हजार थाली-थैले भेजे गए हैं। एक थाली एक थैली प्रयागराज में अखाड़े और आश्रमों में चलने वाले भंडारों के लिए दिया जाएगा। जिससे दाेना-पत्तल और प्लास्टिक के कचरे काे काफी हद तक राेका जा सकेगा। यह कुंभ 45 दिन चलेगा। पहला शाही स्नान 14 जनवरी काे माघ पूर्णिमा पर हाेगा। अमृता देवी पर्यावरण नागरिक संस्थान के स्थानीय संयोजक एवं आरएसएस के पदाधिकारी राकेश खंडेलवाल ने बताया कि त्रिवेणी संगम को प्रदूषण से बचाने और स्वच्छ बनाए रखने के लिए जनजागरण का अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा विश्व को हरित कुंभ का महत्व बताया जाएगा। हरित कुंभ अभियान को सफल बनाने के लिए धार्मिक, सामाजिक संगठनों के साथ विभिन्न समाजों, मंदिरों व रहवासी कॉलोनियों का सहयोग लिया गया है। इसके लिए हर जगह कलेक्शन किया जा रहा है।

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