इंदौर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान को तीन साल बाद कट्टरता फैलाने के आरोपों में मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग से क्लीनचिट मिल गई है। मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आंदोलन किया था और रहमान के खिलाफ भंवरकुआं पुलिस ने केस दर्ज किया था। पहले जानिए क्या है मामला दिसंबर 2022 में इंदौर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में शिक्षकों पर धार्मिक कट्टरता फैलाने का आरोप लगा। मामले में ABVP ने आरोप लगाए थे कि यहां किताब, सामूहिक हिंसा और दांडिक न्याय पद्धति को पढ़ाया जा रहा है जो धार्मिक सौहार्द के खिलाफ है। तब पुलिस ने किताब के लेखक डॉ. फरहत खान, प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान और प्रो. डॉ. मिर्जा मोइज के खिलाफ केस दर्ज किया था। सभी पर आरोप था कि किताब में बिना साक्ष्य के हिन्दू धर्म के खिलाफ झूठी टिप्पणियां की गईं। मुस्लिम शिक्षकों ने जानबूझकर छात्रों को रैफर किया। इस मामले में तब तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने गिरफ्तारी की बात कही थी। फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मप्र शासन के रवैये पर फटकार भी लगाई थी। मप्र उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव वीरन सिंह भलावी द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसमें बताया गया कि ABVP द्वारा इस संबंध में की गई शिकायत के बाद जांच समिति बनाकर रिपोर्ट ली गई। रिपोर्ट में समिति ने कॉलेज में धार्मिक कट्टरता फैलाने, पक्षपात करने, सौहार्दता को भंग करने और सरकारी नीतियों के खिलाफ छात्रों को गुमराह करने की बात कही थी। इन आरोपों में उन्हें 9 दिसंबर 2022 को सस्पेंड किया गया था। इसलिए उन्हें मिली क्लीन चिट ये खबर भी पढ़ें… हिंदुओं को आतंकवादी बताने वाली किताब की लेखिका फरार इंदौर के शासकीय लॉ कॉलेज में धार्मिक कट्टरता फैलाने और अनुशासनहीनता के मामले में जांच कमेटी कॉलेज पहुंची है। कमेटी प्रोफेसर और छात्रों के बयान लेगी। कॉलेज में आईडी कार्ड के बगैर एंट्री नहीं दी जा रही है। कैंपस में ABVP के छात्र नेता मौजूद हैं। प्रो. नरेंद्र देव को कॉलेज के प्राचार्य का प्रभार सौंपा गया है। पूरी खबर पढ़ें


