सरकार ने खनिज परिवहन पर डीलर की ओर से जारी किया जाने वाला ट्रांजिट पास (टीपी) को बंद कर ई-वे बिल लागू कर दिया जिसमें बड़े स्तर पर खामियां रहने से अवैध खनन और ओवरलोडिंग को बढ़ावा मिलेगा। राज्य के खान एवं भूविज्ञान विभाग ने तीन जनवरी, 25 को अधिसूचना जारी कर राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 2017 के नियम 92 में बदलाव कर डीलर्स/स्टॉकिस्ट की ओर से जारी टीपी की अनिवार्यता बजरी (रिवर सेंड), मैसनरी स्टोन, गिट्टी, ग्रिट, क्रेशर डस्ट (एमसेंड) के अलावा अन्य खनिजों पर खत्म कर दी। छह जनवरी, से अचानक टीपी बंद कर उसकी जगह ई-वे बिल लागू कर दिया गया। सरकार ने ग्राउंड स्तर पर जानकारी जुटाए बिना ही ई-वे बिल की नई व्यवस्था लागू कर दी जिससे इतनी खामियां रह गईं कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग को जमकर बढ़ावा मिलेगा। पूर्व में टीपी कंफर्म होने पर गाड़ी फोटो, वाहन में भरा खनिज और उसका भार, कांटे का नाम सहित पूरा विवरण खान अधिकारियों के सामने आ जाता था, लेकिन ई-वे बिल में यह व्यवस्था नहीं होने के कारण अवैध खनन और ओवरलोडिंग का पता ही नहीं चलेगा और डीलर, वाहन मालिक इसका जमकर फायदा उठाएंगे। इसके अलावा अब रॉयल्टी चोरी भी होगी, क्योंकि पूर्व में ईटीपी से पता चल जाता था कि जिस डीलर से माल लाया गया है वह रॉयल्टी पेड हे या नहीं। ई-वे बिल में ऐसी कोई जानकारी नहीं होगी और रॉयल्टी ठेकेदार को यह अधिकार नहीं होता कि वह डीलर के स्टॉक माल की जानकारी और उससे पूछताछ कर सके। खान विभाग के अधिकारी भी चैक करेंगे तो यह पता चलेगा कि डीलर के पास कितने टन माल और मौके पर कितना है, लेकिन बेचे गए माल की जानकारी नहीं मिल पाएगी। इसके अलावा एक जनवरी, 20 को ओवरलोडिंग पर लगाम के लिए पूर्व में साफ्टवेयर के जरिये परिवहन और खान महकमों को लिंकअप किया गया था जिससे कि गाड़ी में ओवरलोड माल भरते ही परिवहन अधिकारियों को पता चल जाता था। लेकिन ई-वे बिल में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं रखा गया। व्यापारी और गाड़ी मालिकों को ओवरलोडिंग से मुनाफा होता है। इसलिए जमकर ओवरलोडिंग की जाएगी, सड़कें टूटेंगी, सड़क हादसे होंगे और लोगों की जान जाएगी। ई-वे बिल क्यों और किसके लिए सरकार की ओर से तय राशि से ज्यादा राशि का माल परिवहन करने पर ई-वे बिल जरूरी होता है। जीएसटी चोरी रोकने के लिए व्यापारियों के माल पर परिवहन के जरिये निगरानी रखने को जारी किया जाता है। एक राज्य से दूसरे राज्य में 50,000 रुपए से ज्यादा का माल परिवहन, राजस्थान में एक से दूसरे जिले में एक लाख रु. से ज्यादा और एक ही जिले में शहर की सीमा में 2 लाख रु. से ज्यादा का माल परिवहन करने पर भेजने वाले, लेने वाले और ट्रांसपोर्ट के लिए ई-वे बिल जरूरी होता है। खामियों को दूर कर लागू करें ई-वे बिल खनन मामलों के जानकार देवेन्द्र सिंह धमोरा का कहना है कि ई-वे बिल के जरिये खान विभाग की मंशा भले ही डीलर-स्टॉकिस्ट के लिए खनिज परिवहन की प्रक्रिया का सरलीकरण करना हो, लेकिन इसके लिए ग्राउंड स्तर पर तैयारी नहीं की गई। बीकानेर जिले में ही 550 डीलर-स्टॉकिस्ट हैं। अब रॉयल्टी संग्रहण ठेकेदार और डीलर्स के बीच विवाद बढ़ेंगे। क्योंकि, ठेकेदार के पास अब वाहन में भरे खनिज के बारे में जांच का कोई अधिकार नहीं है। महकमे को इसका इंतजाम करना चाहिए था। अवैध खनन और ओवरलोडिंग पकड़ने के लिए खान विभाग के अधिकारियों के पास भी ऑनलाइन ई-वे बिल चेक करने की व्यवस्था होनी चाहिए थी। सरकार को चाहिए कि ई-वे बिल में जितनी भी खामियां हैं, उनकी समीक्षा कर समाधान होने के बाद ही इसे लागू करें। यदि कोई खनिज से भरा वाहन बीकानेर से गुजरात के मोरवी ई-रवन्ना या ईटीपी से जाता तो उसमें दूरी 850 से 900 किमी डाली जाती है। इसमें विभागीय सॉफ्टवेयर अनुसार 42 घंटे का समय मिलता और उसके बाद ई-रवन्ना-ईटीपी एक्सपायर हो जाता था। खनिज को अवैध मानकर कार्यवाही की जाती थी। जबकि, तुलनात्मक रूप से ई-वे बिल में प्रतिदिन 200 किमी के अनुसार वाहन को मोरबी पहुंचने के लिए पांच दिन का समय मिलेगा। ई-वे बिल जिस तारीख को जारी होगा उसकी मध्यरात्रि से अगली मध्य रात्रि तक गणना होगी। यानी की ई-वे बिल सुबह 10 बजे जारी हो तो रात को 12 बजे से अगली रात को 12 बजे एक दिन मानकर गणना की जाती है। वाहन को 5 दिन के अलावा सुबह 10 बजे से रात को 12 बजे तक का अतिरिक्त समय और मिल जाएगा। वाहन को 120 और 14 घंटे सहित कुल 134 घंटे का समय मिल जाता है। इतने समय में आसपास के क्षेत्रों में अवैध रूप से माल देकर मोरबी पहुंचा जा सकता है। वाहन के खनन पट्टा क्षेत्र या डीलर प्वाइंट से बाहर निकलने से पूर्व ई-रवन्ना या अन कंफर्म ईटीपी जारी करने का प्रावधान था। ऐसा नहीं करने पर उस वाहन को अवैध मानकर आरएमएमसीआर, 17 के अनुसार कार्यवाही की जाती जिससे अवैध पर अंकुश था। लेकिन, अब डिलीवरी चालान के नाम पर 20 किमी तक कहीं भी बिना रोकटोक आ-जा सकेगा। क्योंकि, वाहनों को छूट दी गई है कि वे डीलर प्वाइंट से 20 किमी तक तौलने के लिए कांटे पर और कांटे से वापस डीलर प्वाइंट ई-वे बिल के बिना ही आ-जा सकेंगे। अवैध खनिज का निर्गमन आसानी से होगा। क्योंकि, ई-वे बिल में खनिज की मात्रा नहीं होती। वाहन में ओवरलोड खनिज भरकर, उसकी कांटा पर्ची लेकर कम वजन का ई-वे बिल बना लिया जाएगा। अधिकारियों की ओर से चेक किए जाने पर ई-वे बिल सही है या गलत, इसका ही पता चलेगा। एक अप्रैल, 25 से नए रॉयल्टी ठेकेदार आने पर विवाद बढ़ेंगे। क्योंकि, पुराने ठेकेदार के समय स्टॉक किए खनिज का निर्गमन करने पर ई-वे बिल जारी होगा और नए ठेकेदार की ओर से गाड़ियां रोकी जाएंगी। ई-वे बिल जारी करने के 24 घंटे मे रद्द किया जा सकता है। अवधि समाप्ति से पूर्व 8 घंटे में समय बढ़ाया जा सकता है। माल लेने वाला ई-वे बिल जारी होने के 72 घंटे या डिलीवरी के समय अस्वीकार कर सकता है। ईटीपी एक बार जारी हो जाती है तो कंफर्म होने पर माल वापस स्टॉक में नहीं आता था, लेकिन ई-वे बिल में स्टॉक में माल वापस आने का प्रावधान है जिसका दुरुपयोग होगा।


