सीहोर जिले के चंदेरी गांव में गुरुवार रात करीब 2 बजे खेत के पास स्थित नाले से बाघ की दहाड़ सुनाई दी। इससे आसपास के गांवों में डर का माहौल बन गया है। किसानों ने खेतों में बाघ के पंजों के निशान दिखने की बात कही है। इससे दो दिन पहले रामाखेड़ी गांव में भी बाघ के पंजे मिलने की सूचना वन विभाग को दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे उनमें नाराजगी है। बाघ की मौजूदगी के कारण किसान रात के समय खेतों में पानी देने नहीं जा पा रहे हैं। चंदेरी, रामाखेड़ी, उलझावन और रलावती जैसे गांवों में बाघ के रातभर घूमने की आशंका से ग्रामीणों की जान को खतरा बना हुआ है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में भय का वातावरण है। किसान रातभर जागकर अपने परिवार और मवेशियों की सुरक्षा करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारी गांवों में गश्त करने या स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने वन रेंज पर प्रदर्शन किया
वन विभाग की कथित उदासीनता से परेशान होकर किसान एवं समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में दर्जनों किसान वन रेंज बिलकिसगंज कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि वन विभाग की निष्क्रियता के कारण किसान भय में रात गुजारने को मजबूर हैं। प्रदर्शन में राम सिंह मेवाड़ा, पर्वत सिंह मेवाड़ा (रामाखेड़ी), अनूप मेवाड़ा, पर्वत मेवाड़ा, गुलाब सिंह मेवाड़ा (मोतीलाल चंदेरी) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, वन मंत्री और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की कि क्षेत्र में तत्काल रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जाए और बाघ को पकड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि भयमुक्त वातावरण के बिना किसान खेती नहीं कर पाएंगे, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।


