यहां भी कुर्सी ही चर्चा में..! ओल्ड जीडीसी में 25 दिन से प्राचार्य नहीं; पढ़ाई, एग्जाम, रिजल्ट अटके

डेंटल कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य पद के लिए खींचतान अभी भी जारी है। शुक्रवार को हाई कोर्ट ने दोनों पक्षकारों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार को कहा, उसके लिए नियमित प्राचार्य की नियुक्ति के विकल्प खुले हैं। अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी। शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने याचिका पर सभी पक्षों की सुनवाई के बाद यह आदेश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट कहा है, जिसके पास चार्ज है, वही स्थिति बनाए रखें। सुनवाई के दौरान डॉ. संध्या जैन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में उनके द्वारा किसी को भी चार्ज नहीं दिया गया है। उन्होंने शुक्रवार को भी अपना कार्य जारी रखा। ऐसे में प्राचार्य का प्रभार उन्हीं के पास है। डॉ. अलका गुप्ता की ओर से दलील दी गई कि आदेश के साथ ही स्पष्ट है, उन्हें चार्ज भी मिल गया है। सरकार ने ही डॉ. जैन को कार्य मुक्त कर दिया था। मैंने शुक्रवार को काम भी किया है। उन्होंने कार्यभार भी संभाल लिया है। सरकार की ओर से उपमहाअधिवक्ता श्रेय राज सक्सेना, याचिकाकर्ता की ओर से अभिभाषक मनोज मानव और डॉ. गुप्ता की ओर से अभिभाषक एलसी पटने ने पक्ष रखा। डेंटल कॉलेज विवाद प्राचार्य को लेकर यथास्थिति रखें : हाई कोर्ट एमजीएम मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज के बाद अब कुर्सी को लेकर माता जीजाबाई गर्ल्स पीजी कॉलेज (ओल्ड जीडीसी) चर्चा में है। 1952 में शुरू हुए ओल्ड जीडीसी के इतिहास में पहली बार यह स्थिति बनी है िक 25 दिन से प्राचार्य ही नहीं है। स्थायी प्राचार्य तो दूर कॉलेज में कोई प्रभारी प्राचार्य तक नहीं है। प्राचार्य की कुर्सी खाली पड़ी है और सारा कामकाज प्रशासनिक अधिकारी के भरोसे चल रहा है। इस कारण सारे एकेडमिक निर्णय रुक गए हैं और जरूरी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसी कारण 14 कॉलेजों के सैकड़ों कर्मचारियों व फैकल्टी का वेतन भी अटक गया है। चूंकि ओल्ड जीडीसी अग्रणी कॉलेज है, इसलिए 10 अनुदान प्राप्त, चार नए शासकीय कॉलेजों के वेतन पर हस्ताक्षर का अधिकार भी यहीं के प्राचार्य को होता है। शासन ने पीएम एक्सीलेंस व ऑटोनॉमस कॉलेजों में पहली बार इंटरव्यू के आधार पर प्राचार्य की नियुक्तियां की थीं। उसी के बाद से प्राचार्य पद को लेकर जंग छिड़ गई है।

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