थार लेकर जाता नीलगायों का सिर काटने वाला शिकारी:फेसबुक के जरिए बनाई गैंग, फोन पर ऑर्डर मिलते ही शिकार, मांस की होटलों में सप्लाई

जयपुर के चौमूं इलाके में नीलगायों का सिर काटकर शिकार करने में टोंक की शातिर किशन बावरिया गैंग का नाम सामने आया है। ग्रामीणों के हत्थे चढ़े एक शिकारी ने गैंग को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गैंग का सरगना किशन बावरिया काफी शातिर बदमाश है। वह ऑन डिमांड शिकार करता है। फोन पर ऑर्डर मिलने के बाद पहले रेकी करता है। फिर अपनी लग्जरी गाड़ी थार में हथियार रखकर शिकार करने जाता है। किशन ने विकास को एक हजार रुपए रोज की दिहाड़ी पर बतौर बाइक राइडर रखा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, सबलपुरा में 8 जनवरी की रात गैंग को 5 नीलगाय का ऑर्डर मिला था। गैंग के शिकारी उस रात 4 नीलगाय को मार चुके थे, लेकिन 5 ऑर्डर पूरा करने के लिए रुक गए। ग्रामीणों को पता लगा तो घेरने पर गैंग का एक बदमाश विकास पकड़ में आ गया। एक साथ कई नीलगायों के शिकार की घटना की पड़ताल करने भास्कर टीम गांव संबलपुरा पहुंची। मामले में शिकारी गिरोह के बारे में जो बातें सामने आई वह चौंकाने वाली थीं। सबलपुरा गांव में जाने से पहले तीन जंगलों में तलाश किया शिकार
कालाडेरा थाना पुलिस ने किशन बावरिया गिरोह के सदस्य विकास को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सबलपुरा में नीलगायों के शिकार से पहले उसने दो और इलाकों में रेकी की थी। वहां पर उन्होंने शिकार तलाश किया, लेकिन मिला नहीं। सीआई कमल सिंह ने बताया कि गिरोह में सात लोग थे। ये लोग आठ जनवरी की शाम 6 बजे शाहपुरा के जंगलों और उसके बाद जालसू गए। खेतों-गौचर में बदमाशों ने करीब डेढ़ दो घंटे तक नीलगायों को तलाशा। इसके बाद वहां भी जब कोई शिकार नहीं मिला तो जालसू से करीब 13 किलोमीटर दूर सबलपुरा गांव की तरफ पहुंच गए। यहां पर काफी घना जंगल क्षेत्र और गौचर इलाका है। आस-पास खेतों में गिरोह को नीलगायें नजर आ गईं। इसके बाद उन्होंने गौचर में जाकर कूचों के बीच में (सूखी झाड़ियों) डेरा जमाया। यहां पर बदमाशों ने शिकार का इंतजार किया। रात करीब 2 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक शिकार करते रहे। बदमाशों के पास 0.22 एमएम की राइफल, धारदार चाकू और कुल्हाड़ी थी। शिकार करने के बाद नीलगायों की चमड़ी उतारकर मांस निकाला। नीलगायों के सिर को भी काट दिया। डिमांड पांच की थी, शिकार तलाशने में हुए लेट
शिकारी गैंग के पास 5 नीलगाय का मांस लाने के लिए डिमांड आई थी। चार नीलगाय का शिकार सुबह करीब साढे पांच बजे तक कर लिया था। एक और शिकार करने के चक्कर में पूरी गैंग वहीं रुकी रही। गिरोह के सदस्यों ने वहां से निकलने के लिए भी कहा, लेकिन सरगना किशन बावरिया बोला- पांच की डिमांड पूरी करनी है। थोड़ी ही दूर एक और नीलगाय मिल भी गई। बदमाशों ने फायरिंग कर उसे मार दिया। तब तक सुबह हो चुकी थी। ग्रामीणों को भी शिकार की भनक लग गई। गांव सबलपुरा के रहने वाले रामकिशोर मीणा ने बताया- 8 जनवरी की सुबह साढ़े 6 बजे एक पिकअप गौचर में खड़ी थी। मुझे देखते ही वह पिकअप वाला भाग गया। मौके पर जाकर देखा तो वहां एक नीलगाय का सिर पड़ा था। इस पर ग्रामीणों को सूचना दी। पूरी प्लानिंग की और गौचर के पास घरों में रहने वाले लोगों को हिदायत दी कि रात में कोई भी हलचल हो तो तुरंत घेराबंदी करनी है। 9 जनवरी को सुबह फायरिंग और गाड़ियों की आवाज सुनाई दी। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे। शिकारियों को पकड़ने की कोशिश की। हमने बाइक पर भाग रहे विकास को दबोच लिया। बाकी बदमाश गाड़ियां लेकर भाग निकले। शिकारियों ने पिकअप में तीन नीलगाय का मांस पहले से भरकर रवाना कर दिया था। पुलिस 4-5 शिकार बता रही है। हकीकत में सबलपुरा क्षेत्र में 25 से ज्यादा नीलगायों का शिकार हुआ है। एक हजार रुपए में बाइक राइडर रखा
पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि गिरोह का सरगना किशन बावरिया है। वही गैंग का मुख्य शूटर है, जो निशाना लगाने में माहिर है। उसने फेसबुक के जरिए जयपुर के सैकड़ों गांवों में अपनी पूरी गैंग खड़ी कर रखी है। गिरफ्तार हुआ विकास भी फेसबुक के जरिए ही किशन बावरिया से कुछ महीने पहले जुड़ा था। किशन ने विकास को एक हजार रुपए रोज की दिहाड़ी पर बाइक राइडर रखा था। विकास का काम शिकार के दौरान बाइक चलाना था। उसके पीछे किशन या अन्य शिकारी बैठते थे। विकास शिकार के पीछे बाइक को दौड़ाता था। पीछे बैठा किशन शिकार पर फायर करता था। विकास मूल रूप से नींदड का रहने वाला है, जो कि कई सालों से दातारामगढ़ में रह रहा था। पुलिस ने बताया कि गिरोह के लोग इतने शातिर हैं कि शिकार के बाद मौके पर खाली खोखे भी नही छोड़ते, ताकि किसी को शिकार का शक न हो। इसके अलावा किशन, हर शिकार पर जाने से पहले पिकअप और उसका ड्राइवर चेंज करता था। ताकि पिकअप के जरिए मांस पहुंचाने वालों को गैंग की कोई खास जानकारी नहीं मिले और पुलिस उसे ट्रेस न कर सके। 70 रुपए किलो बेचते हैं नीलगाय और गौवंशों का मांस
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिकार की गई नीलगाय और गौवंशों का मांस टोंक में होटलों में सप्लाई होता है। इसके अलावा जयपुर में भी किसी बिचौलिये को माल सप्लाई किया जाता है। इसके लिए एडवांस ऑर्डर आता है कि कितना माल चाहिए, उसी के अनुसार गिरोह शिकार करता है। बदमाश 70 रुपए किलो के हिसाब से मांस सप्लाई करते हैं। बिचौलिए आगे होटलों में महंगे दाम पर बेचते हैं। पुलिस सप्लाई करने वाले बिचौलिए और उन होटलों की भी जांच कर रही है। नीलगाय का वजन 250 से 300 किलो तक होता है। एक नीलगाय को बदमाश 20 से 21 हजार रुपए बेचते हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह जयपुर और आस-पास ग्रामीण क्षेत्र में एक्टिव है। कुछ समय पहले आंधी थाना क्षेत्र में हुए गौवंशों के शिकार मामले में भी इसी गिरोह का हाथ होने की आशंका है। पुलिस के अनुसार, मुख्य सरगना किशन के गिरफ्त में आने के बाद ही इस मामले में और खुलासे होंगे। लग्जरी लाइफ जीता है गिरोह का सरगना
पुलिस की मानें तो सरगना किशन बावरिया ने लाखों-करोड़ों की संपत्ति बनाई है। आरोपी का टोंक में आलीशान बंगला है। इसके अलावा उसके खुद के पांच ट्रक हैं। एक मेजर डीआई जीप है, जिसका इस्तेमाल गैंग के लोग करते हैं। एक लग्जरी थार गाड़ी भी उसने हाल ही में खरीदी है, जिसमें बैठकर वह खुद शिकार करने जाता है। उसे रील बनाने का भी काफी शौक है। बदमाश की गैंग में वर्तमान में सुरेश, मोहन उर्फ अटैक, हसन, गणेश बावरिया, विकास और एक दो अन्य शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि इस पूरे मामले में अभी पड़ताल चल रही है। ग्रामीण बोले- दो दिन से थी आवाजाही, 5 नहीं 25 से ज्यादा शिकार
नीलगायों के शिकार के बाद सबलपुरा गांव के ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस नीलगाय के शिकार की संख्या छिपा रही है। गांव में 40 से ज्यादा नीलगाय का शिकार हुआ है, जबकि पुलिस पांच ही बता रही है। गांव की सरपंच एकता कंवर और उपसरपंच मदनलाल पतालिया ने आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। इलाके में पुलिस गश्त के पुख्ता बंदोबस्त करने को भी कहा गया है। सबलपुरा गांव के नजदीकी गांव टाढावास के शिवराम और सुरेश कुमार ने बताया कि शिकारियों ने यहां 40 से ज्यादा शिकार किए हैं। पुलिस और वन विभाग अपने बचाव में संख्या कम बता रहा है। ग्रामीणों ने मामले को लेकर आंदोलन की भी चेतावनी दी है। यह भी पढ़ेंः जयपुर में 24 नीलगाय के सिर काटकर फेंके:जंगल में खाल और अन्य अवशेष मिले; ग्रामीणों ने एक शिकारी को पकड़कर पुलिस को सौंपा

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