पावन मन मुक्ति का आधार, मतभेद हो जाए, मनभेद नहीं रखें : संत धैर्य मुनि

भास्कर न्यूज|ब्यावर विगत 6 माह पूर्व अपार संपदा छोड़कर संयम पथ के पथिक बने नगर के दो मुमुक्षु जैन साधु बनकर अपनी जन्म भूमि ब्यावर में जैन धर्म की दिव्य पताका लहरा रहे हैं। दोनों जैन संत एक सप्ताह से विनोद नगर स्थित जय चौथ भवन में जिनवाणी का रसपान करवा रहे हैं। जय चौथ भवन में संत धैर्य मुनि ने धर्म सभा में कहा कि पावन मन मुक्ति का आधार होता है। मनुष्य को अपना मन सदैव शुद्ध रखना चाहिए। तीन योगों से सबसे पहला स्थान मन का होता है। सबसे ज्यादा कर्मों का बंधन व निर्जरा मन के आधार पर होते हैं। जिस तरह से भंवरा अपना मन रूपी फूल का रस पीने में लगाए रखता है। उसी में अपना जीवन पूरा कर देता है। शास्त्रों में मुख्य रूप से मन की व्याख्या तीन प्रकार से की गई वे हैं मरा मन, डरा मन, खरा मन। जो खड़े मन वाला होता है, वो वीरता एवं मजबूती से सारी क्रिया का समाधान कर लेता है मानव में मतभेद भले ही हो। मनभेद नहीं होना चाहिए। मन भेद होने से घर, परिवार, समाज सभी जगह आत्मीयता के भाव बढ़ते हैं। अतः मन को सदैव सरल रखना चाहिए। आज ज्ञानम से विहार कर प्रताप कॉलोनी पहुंचेंगे| श्री जैन जय चौथ संघ के मंत्री दुलीचंद मकाणा ने बताया कि संत मंडल शनिवार सुबह लोकाशाह नगर स्थित ज्ञानम से विहार करके प्रताप कॉलोनी पहुंचेंगे जहां उनके प्रवचन सुबह 9:15 बजे होंगे। संत धैर्य मुनि अपने सहयोगी संत के साथ रविवार को अपनी कर्म स्थली कुंदन नगर में प्रवास करेंगे। संघ मंत्री दुलीचंद मकाणा ने बताया कि विगत एक पखवाड़े से नगर में प्रवास कर रहे हैं। दोनों जैन संतों के ब्यावर के उपनगरों में प्रवास से धर्म ध्यान का अनुपम ठाट लगा रहा। संत प्रवर ने एक सप्ताह तक विनोद नगर स्थित जय चौथ भवन में जिनवाणी का पावन बरखा बरसा कर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं को भगवान महावीर की जिनवाणी में गहरे गोते लगवाए। संतों के प्रवास से युवाओं का धर्म ध्यान के प्रति गहरा रुझान बढ़ा। संत धैर्य मुनि एवं धीरज मुनि के सान्निध्य में श्रावक-श्राविकाएं सामायिक साधना के साथ धर्म-ध्यान, तप-जप में रत दिखाई दिए।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *