भास्कर न्यूज | ब्यावर ब्यावर जिले के आखिरी छोर पर 15 किलोमीटर में बसे गाफा, चरपला, इमली का बाड़िया, साझा, सुजानपुरा, पनिया 2, अलजीरिया ऐसे गांव हैं, जहां अभी भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। इन गांवों में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं आता। लोगों को एक कॉल लगाने के लिए भी 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इससे ग्रामीणों को कई योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलता है। गांव में आज तक सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है। इन गांवों की जनसंख्या करीब 5500 है। अधिकांश ग्रामीण खेती और नरेगा में काम कर जीवन यापन करते हैं। गांव के युवा वर्ग बाहरी राज्यों में रोजगार करते हैं। इन गांंवों में ई मित्र, मिनी बैंक, स्वास्थ्य विभाग जैसी भी कोई सुविधा नहीं है। गाफा में स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन भवन पर ताला लगा रहता है। स्वास्थ्य केन्द्र जाने तक के रास्ते पर झाड़ियां उग गई हैं। ऐसे में मरीज को 13 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। सरकारी योजनाओं से वंचित ग्रामीण: सरकारी योजना इन गांवों तक नहीं पहुंच पाती, क्योंकि सरकार की तरफ से बच्चे के जन्म पर सरकार की तरफ से राशि दी जाती है जिसके कारण महिलाओं को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। इन गांवों में अधिकांश महिलाओं को सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि अभी तक नहीं मिली है। इन गांवों में अधिकांश ग्रामीण खेती करके जीवन यापन करते हैं। स्वास्थ्य केन्द्र की स्थिति: गाफा गंाव में एक उप स्वास्थ्य केन्द्र स्थित है। यह एक साल पहले ही खुला था लेकिन संसाधनों के अभाव के कारण ये अधिकांश समय बंद ही रहता है। इस कारण उप स्वास्थ्य केन्द्र की ओर जाने वाले रास्ते पर झाड़ियां उग गई हैं। यदि गंभीर स्थिति में यदि किसी मरीज को दिखाना हो तो गांव से 13 किलोमीटर दूर बड़ाखेड़ा, जस्साखेड़ा में जाना पड़ता है। गंभीर स्थिति मेंें मरीजों को ब्यावर रैफर करना पड़ता है। सरकारी स्कूलों की स्थिति: गाफा की स्कूल में स्मार्ट टीवी लगी है लेकिन नेटवर्क की कमी से ये किसी काम की नहीं। शिक्षकों को कुछ सरकारी काम हो तो घर जाकर करना पड़ता है। शिक्षक शाम को घर पर पहुंचने के बाद उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। शिक्षा विभाग से संबंधित कोई भी आदेश या सूचना आते हैं तो समय तक विद्यालय तक नहीं पहुंच पाते। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी नहीं आते और जो अधिकारी आते हैं वे केवल औपचारिकता निभाकर चले जाते हैं। चरपला गांव के विद्यालय में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है जिसके कारण बच्चों व शिक्षकों को स्कूल के पास स्थित ग्रामीणों के घरों में से पानी रोजाना लाना पड़ता है। अलजीरिया गांव में मूलभूत सुविधा के नाम पर केवल स्कूल का भवन है। इन स्कूल में लाइट, पानी व सड़क की सुविधाएं नहीं है। इन गांवों में शिक्षक छात्र व छात्राओं के अभिभावकों से मिल भी नहीं पाते हैं। शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय में ऐसे भी बच्चे हैं जिनके अभिवावक दो तीन साल होने के बाद भी छात्र व छात्राओं को संभालने तक नहीं आते।


