गांवों की प्यास बुझे, इसलिए रोज पानी में उतरते हैं;VIDEO:मोटर चलाने के लिए रोज पार करते हैं 1KM लंबी नदी, इसमें कई जहरीले जीव भी

सबसे पहले ऊपर की तस्वीर देखिए… 50 साल के नंदाराम का यह रोज का काम है। जाड़ा, गर्मी, बरसात… मौसम कोई भी हो। उन्हें रोज इसी तरह कमर भर पानी में उतरना पड़ता है। अगर एक दिन नंदाराम पानी में इस तरह न उतरें तो तीन गांवों के लोग बूंद-बूंद के लिए तरस जाएंगे। प्यासे रह जाएंगे। पूरा मामला समझने के लिए आपको भीलवाड़ा के मांडल तहसील के पीथास गांव चलना पड़ेगा। इससे पहले ये 4 PHOTOS देखिए… 5 हजार की आबादी की सुविधा का सवाल है
जलदाय विभाग का वाटर वर्क्स मेजा बांध के पेटा क्षेत्र में बना हुआ है। यहां लगे के मोटर के माध्यम से पीथास, मालाखेड़ा और स्कूल का खेड़ा (कुल तीन गांव) गांवों में पानी की सप्लाई होती है। पीथास गांव की करीब तीन हजार, मालाखेड़ा की 800 और स्कूल खेड़ा की आबादी 1 हजार है। यह मोटर जहां लगी है, वह जगह चारों तरफ से कोठारी नदी के पानी में घिरा रहता है। रोज मोटर चलाने की जिम्मेदारी नंदाराम की है। वह रोज नदी के बीच से होकर मोटर वाले कमरे तक पहुंचते हैं। वहां मोटर का स्विच ऑन करते हैं। करीब 2 घंटे तक मोटर चलती है। इस दौरान वहीं रुकना होता है। कभी-कभी तो बिजली के फ्यूज में परेशानी आ जाती है। उसे भी नंदाराम ही ठीक करते हैं। 5 डिग्री में भी उतरते हैं पानी में
सर्दी के मौसम में पारा 5 डिग्री तक पहुंच जाता है। फिर भी सुबह-सुबह नंदाराम मोटर चलाने कमर भर पानी के बीच से करीब एक किलोमीटर का रास्ता तय करते हैं। नंदाराम बताते हैं- हर साल ये समस्या होती है। पिछले दो महीने से रोजाना सुबह 6 बजे तीन फीट पानी में उतरता हूं और मोटर चालू करने जाता हूं। बिना किसी सुरक्षा संसाधनों के पानी में उतरना मजबूरी है। कई बार डर भी लगता है लेकिन मन में ख्याल आता है कि यदि मोटर चालू नहीं हुई तो लोगों को पीने का पानी कैसे मिलेगा। रोजाना 9 घंटे लगते हैं, लाइनमैन का काम भी खुद ही करते हैं जलदाय विभाग ने नंदाराम को नलकर्मी की पोस्ट पर संविदा पर लगाया हुआ है। महीने के 400 रुपए उन्हें इस काम के लिए मिलते हैं। नंदाराम कहते हैं- रोजाना वाटर वर्क्स की टंकियों को भरने में लगभग 9 घंटे लग जाते हैं। इसके बाद गांव में करीब 4 घंटे पेयजल सप्लाई की जाती है। तीन फीट गहरे पानी में जहरीले जीत-जंतुओं का भी खतरा बना रहता है। कई बार पानी में सांप तैरते हुए मिल जाते हैं। हर बार जान का खतरा बना रहता है। कुएं पर लगे बिजली के उपकरणों में फॉल्ट आने पर लाइनमैन का काम भी मुझे ही करना होता है। इनपुट: जितेंद्र सिंह गौड़, मांडल

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *