हाईकोर्ट जोधपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन:साल की अंतिम लोक अदालत में कई मामले निस्तारित, वकीलों के बहिष्कार से प्रभावित रही कार्यवाही

राजस्थान उच्च न्यायालय मुख्य पीठ जोधपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शुक्रवार को वर्ष की अंतिम और चौथी ‘राष्ट्रीय लोक अदालत’ का आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति और राजीनामे के माध्यम से लंबित प्रकरणों का मौके पर ही निपटारा किया गया। हालांकि, वकीलों के स्वैच्छिक बहिष्कार की वजह से अधिकांश अधिवक्ता लोक अदालत में पेश नहीं हुए, जिससे कार्यवाही प्रभावित रही।​ लोक अदालत का शुभारंभ राजस्थान उच्च न्यायालय की जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी, जस्टिस सुनील बेनीवाल और जस्टिस संजीत पुरोहित ने दीप प्रज्वलन कर किया। यह आयोजन दोपहर 3:30 बजे शुरू हुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (लोक अदालत) विनियम 2009 (यथा संशोधित 2019) के प्रावधानों के अनुपालन में तीन विशेष बैंचों का गठन किया गया था।​ किन मामलों का हुआ निपटारा लोक अदालत में वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, दीवानी व राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने विवादों को आपसी सहमति से सुलझाया गया। इसके अलावा बैंक रिकवरी और बिजली बिल से जुड़े मामलों में भी छूट के साथ निपटारा हुआ। जिन पक्षकारों के मामलों का निस्तारण हुआ, उनके चेहरे पर खुशी लौट आई।​ समय और धन दोनों की बचत जस्टिस डॉ नूपुर भाटी ने बताया कि लोक अदालत में कोई जीतता नहीं और कोई हारता नहीं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्याय व्यवस्था का वह सुलभ माध्यम है, जहां समय और धन दोनों की बचत होती है। जस्टिस भाटी ने कहा कि वे चाहती हैं कि अधिक से अधिक लोग इस मंच का लाभ उठाएं।​ तीन बैंचों का किया गया था गठन उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय लोक अदालत बैंच संख्या 1 (कोर्ट नंबर 10) की अध्यक्षता जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने की और राजकीय अधिवक्ता संजय राज पालीवाल को मनोनीत सदस्य बनाया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत बैंच संख्या 2 (कोर्ट नंबर 13) की अध्यक्षता जस्टिस सुनील बेनीवाल ने की और राजकीय अधिवक्ता ऋतुराज सिंह भाटी को इस बैंच का मनोनीत सदस्य नियुक्त किया गया था। इसी तरह, राष्ट्रीय लोक अदालत बैंच संख्या 3 (कोर्ट नंबर 25) की अध्यक्षता जस्टिस संजीत पुरोहित ने की और अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता मुकेश दवे इसमें मनोनीत सदस्य के रूप में रहे।​

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