जोधपुर में 3 साल पहले हुए हिस्ट्रीशीटर लवली कंडारा एनकाउंटर की जांच अब CBI करेगी। 9 जनवरी को CBI ने FIR करके जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लवली के एनकाउंटर का दावा किया था। लवली के परिवार वालों ने हत्या का आरोप लगाते हुए 4 दिन तक शव रखकर प्रदर्शन किया था। यह पूरा मामला जोधपुर के रातानाड़ा इलाके में 13 अक्टूबर 2021 को हुआ था। जांच CBI क्राइम ब्रांच के DSP मोहिंदर सिंह को सौंपी गई है। इसमें रातानाड़ा थाने के तत्कालीन एसएचओ लीलाराम, कॉन्स्टेबल जितेन्द्र सिंह, किशन सिंह, विश्वास और गनमैन अंकित को नामजद किया गया है। 31 अक्टूबर 2023 को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया था। SUV में भागते हुए करता रहा था फायरिंग हॉस्पिटल में हुई थी लवली की मौत
जोधपुर-जयपुर रोड पर लवली की एसयूवी ने बाइक पर जा रहे दंपती को टक्कर मार दी थी। एसयूवी के रुकते ही लीलाराम की गाड़ी भी बगल में आ गई। लवली की पहली गोली कार के बंपर व दूसरी लीलाराम के पैरों के पास लगी। लवली ने दूसरी गोली चलाई, लेकिन पिस्टल में फंसी रह गई। जवाबी कार्रवाई करते हुए लीलाराम ने 7 फायर किए। गोलियां लवली के सीने, पेट और हाथ में घुस गई थीं। लवली के ढेर होते ही उसके साथी भागने लगे तो लीलाराम ने 8वां फायर हवा में किया और ड्राइवर को पकड़ लिया था। गंभीर रूप से घायल हालत में पुलिस लवली को हॉस्पिटल ले गई, जहां उसकी मौत हो गई। मौके से उसके तीन साथी बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। समाज ने हत्या का आरोप लगाया था
लवली कंडारा की मौत के बाद आक्रोशित वाल्मीकि समाज के लोगों ने आंदोलन किया। समाज का कहना था कि पुलिस ने जानबूझकर लवली की हत्या की है। इसके पीछे तत्कालीन थानाधिकारी लीलाराम की व्यक्तिगत रंजिश होना बताया गया था। इस मामले में वाल्मीकि समाज और प्रशासन के बीच 4 दिन तक विवाद बना रहा। हनुमान बेनीवाल भी वाल्मीकि समाज के धरने में शामिल हुए। वाल्मीकि समाज ने लवली कंडारा के एनकाउंटर को फर्जी बताया। सीबीआई जांच और पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग को लेकर शव नहीं उठाया और धरना शुरू कर दिया था। एडीजी ने उस समय के एसएचओ लीलाराम सहित तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। पुलिस ने भी किया था प्रदर्शन
कार्रवाई से नाराज पुलिसकर्मियों ने मेस का बहिष्कार कर अपना विरोध जताया था। एसएचओ लीलाराम व अन्य पुलिसकर्मियों के पक्ष में ट्वीटर पर अभियान चलाया गया। पुलिस के पक्ष में 50 हजार से ट्वीट किए गए। लवली के घरवालों ने सीबीआई जांच के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया। मामले की गूंज विधानसभा तक पहुंची। आखिरकार, जिला कलेक्टर की अगुवाई में हुई वार्ता में रातानाड़ा थानाधिकारी लीलाराम को निलंबित करने, थानाधिकारी सहित अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने, इसकी जांच सीबीआई से कराने का भरोसा दिए जाने पर आंदोलन स्थगित हुआ था। भाई ने कोर्ट के जरिए दर्ज कराया था मुकदमा
रातानाड़ा थाने के तत्कालीन एसएचओ लीलाराम और अन्य के खिलाफ हत्या व साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए लवली के भाई नरेश कंडारा ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने 2 दिसंबर 2021 को पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। लवली के भाई ने तत्कालीन रातानाड़ा थानाधिकारी मूल सिंह और भारत रावत के खिलाफ आदेशों की अवहेलना करने के संबंध में कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया था। इस पर दोनों तत्कालीन थानाधिकारियों के खिलाफ भी कोर्ट ने संज्ञान लिया था। इसके बाद रातानाड़ा थाने में 5 जुलाई 2023 को एफआईआर दर्ज की गई। इसकी जांच भी सीआईडी सीबी में चली गई है। ……. लवली कंडारा एनकाउंटर की ये खबरें भी पढ़िए…
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