रीवा में भाजपा की अंदरूनी खींचतान:भाजपा विधायक पर पुराने पार्टी कार्यालय को ढहाने का आरोप, जिलाअध्यक्ष ने दी एफआईआर की चेतावनी

विंध्य में भाजपा की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। शुक्रवार को एक नया विवाद सामने आया कि भाजपा विधायक पर ही भाजपा कार्यालय गिराने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा टकराव देखने को मिला। मामला तब सामने आया जब तीन जेसीबी मशीनें पुराने भाजपा कार्यालय को गिराने लगीं। क्या है पूरा मामला
मामला चित्रकूट से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार से जुड़ा बताया जा रहा है। वह साल 2023 में विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने हैं। आरोप है कि विधायक से जुड़े लोगों ने भाजपा कार्यालय परिसर में बुलडोजर चलवाकर निर्माण गिरा दिया। जैसे ही इसकी जानकारी मिली, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता मौके पर पहुंचे और कार्रवाई को सिरे से गलत बताते हुए कड़ा एतराज जताया। जिलाअध्यक्ष ने एफआईआर की बात कही जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने बेहद सख्त तेवर अपनाते हुए कहा कि यह केवल संगठनात्मक मामला नहीं, बल्कि सीधे कानून और पार्टी की प्रतिष्ठा से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, न कि उस पर केवल विचार किया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने इसे खुली चुनौती बताते हुए कहा कि भाजपा विधायक द्वारा अतिक्रमण गिराया जाना मामले को और भी गंभीर बनाता है। जिलाध्यक्ष ने साफ कहा कि बिना संगठन की अनुमति भाजपा कार्यालय पर कार्रवाई करना अस्वीकार्य है और इसकी पूरी जानकारी प्रदेश भाजपा कार्यालय को दी जा रही है। उन्होंने संकेत दिए कि संगठन स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी। घटना के बाद मौके पर भारी हंगामा हुआ। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम स्पीकर व्यंकटेश पांडेय भी जिलाध्यक्ष के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और भाजपा कार्यालय परिसर कुछ समय के लिए रणक्षेत्र जैसा नजर आया। वहीं, निर्माण गिरा रहे लोगों ने दावा किया कि कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है। हालांकि भाजपा जिलाध्यक्ष ने इस दावे पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर ऐसा कोई आदेश है तो उसे सार्वजनिक और संगठन के सामने रखा जाए। नया ऑफिस अटल कुंज में हो रहा संचालित
हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि भाजपा का वर्तमान जिला कार्यालय ‘अटल कुंज’ में संचालित हो रहा है, जबकि जिस भवन पर कार्रवाई हुई वह पार्टी का पुराना कार्यालय था। इस घटनाक्रम ने भाजपा की अंदरूनी कलह को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या पार्टी अपने ही विधायक पर कानूनी कार्रवाई की अनुमति देगी, या फिर यह मामला राजनीतिक दबाव में ठंडे बस्ते में चला जाएगा। प्रदेश नेतृत्व के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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