ग्वालियर में हस्तशिल्प वर्कशॉप शुरू:ज्यादातर महिलाओं ने कराया रजिस्ट्रेशन, राष्ट्रपति अवार्डी शिल्पकार देंगे प्रशिक्षण; प्रतिदिन 300 रुपए भी मिलेंगे

केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत कार्यालय विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) द्वारा ग्वालियर में नए शिल्पियों को तैयार करने के लिए एक विशेष हस्तशिल्प प्रशिक्षण वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। यह वर्कशॉप 19 दिसंबर को शुरू हुई है और 3 मार्च 2026 तक चलेगी, जिसमें चयनित 30 प्रतिभागियों को मूर्तिकला का प्रशिक्षण दिया जाएगा। खास बात यह है कि चयनित प्रशिक्षुओं में 90 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। मूर्तिकला की बारीकियां सिखाएंगे दीपक विश्वकर्मा इस वर्कशॉप के मास्टर ट्रेनर राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित प्रसिद्ध शिल्पकार दीपक विश्वकर्मा हैं। उनके मार्गदर्शन में नए शिल्पियों को मूर्तिकला की बारीकियां सिखाई जाएंगी। वर्कशॉप का आयोजन ग्वालियर के बेजाताल स्थित RACDC कैंपस में किया जा रहा है। मिलेगा स्टाइपेंड और किट यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क है। भारत सरकार की ओर से चयनित प्रशिक्षुओं को प्रतिदिन 300 रुपए का स्टाइपेंड, करीब 10 हजार रुपए मूल्य की शिल्पकार वर्कशॉप किट दी जा रही है। यह वर्कशॉप 2025 इंटरनेशनल ईयर ऑफ को-ऑपरेटिव के तहत आयोजित की जा रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी मास्टर ट्रेनर दीपक विश्वकर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के चलते अब इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पहले मूर्तिकला के क्षेत्र में मुख्य रूप से पुरुष शिल्पकार ही सक्रिय रहते थे, लेकिन इस वर्कशॉप में 90 प्रतिशत महिलाएं चयनित हुई हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। मूर्तिकला की हर विधा का मिलेगा प्रशिक्षण वर्कशॉप में प्रशिक्षुओं को 3 मार्च 2026 तक मूर्तिकला से संबंधित गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें भारत की विभिन्न मूर्तिकला शैलियां, ड्राइंग और डिजाइनिंग, पत्थरों की पहचान और सामान्य पत्थर को कलात्मक मूर्ति में बदलने की तकनीक जैसे विषय शामिल हैं। दीपक विश्वकर्मा का कहना है कि इस प्रशिक्षण से तैयार होने वाला हर शिल्पकार न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि आगे चलकर कम से कम चार अन्य लोगों को रोजगार भी दे सकेगा। प्रशिक्षुओं में उत्साह वर्कशॉप के लिए चयनित प्रशिक्षु रेणु विश्वकर्मा और रेखा सोनी ने कहा कि केंद्र सरकार के इस प्रयास से उन्हें अपनी कला को और बेहतर ढंग से निखारने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे शिल्पकला के माध्यम से खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकेंगी। GI टैग से मिली पहचान गौरतलब है कि ग्वालियर के मिंट स्टोन को भारत सरकार द्वारा GI टैग दिया गया है। इसी वजह से यहां के शिल्पकारों को देशभर से मूर्तियों के ऑर्डर मिलते हैं। ग्वालियर की मूर्तिकला आज देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। केंद्र सरकार के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से न केवल नए शिल्पी तैयार होंगे, बल्कि ग्वालियर की मूर्तिकला और मिंट स्टोन शिल्प को भी राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलेगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *